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Tuesday, July 23, 2024

रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर से संतों, विद्वानों और बुद्धिजीवियों ने लिया सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प

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भारत के सशक्त और महान सनातन लोकमत से विश्व को उम्मीद : शिव प्रताप शुक्ल

विश्व में शांति और मानवीय विकास के लिए सक्षम और सशक्त भारत का निर्माण जरूरी : शिव प्रताप शुक्ल

सक्षम राष्ट्र के निर्माण के लिए सभी सहभागी बनें : लक्ष्मणाचार्य

सनातन संस्कृति भारत की आत्मा, संत इसके संरक्षण के लिए हर बलिदान देंगे : स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती

वाराणसी/संसद वाणी : देश के संतों, विद्वानों और बुद्धिजीवियों ने आज यहां रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में एक स्वर से सशक्त, सनातन और महान लोकतांत्रिक भारत को 2047 तक हर हाल में विश्वगुरु बनाने का संकल्प लिया। काशी में इस अद्भुत और अत्यंत गंभीर विमर्श का आयोजन अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, श्री गंगा महासभा, श्री काशी विद्वतपरिषद और भारत संस्कृति न्यास ने संयुक्त रूप से किया था।

कार्यक्रम की विषय प्रस्तावना संघ के प्रांत प्रचारक रमेश जी ने की। मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने सक्षम और सशक्त भारत के निर्माण में सभी को जुटने की अपील करते हुए कहा कि अखंड, शाश्वत, सनातन विश्वगुरु भारत की दमकती तस्वीर का रेखांकन हम कर पा रहे हैं। ऐसे महान भारत का चित्र जिसको रचने में भारत का नेतृत्व अपनी पूरी शक्ति और आस्थावान संकल्प के साथ जुटा हुआ है। विगत वर्षों में भारत को आत्मनिर्भरता , आर्थिक संपन्नता , सामरिक सुदृढ़ता और विश्व को सांस्कृतिक मानवीय नेतृत्व प्रदान करने की क्षमता दी है। ऐसे में हम सभी भारतीयों का यह कर्तव्य बन जाता है कि अपनी इसी सनातन संस्कृति की अवधारणा को और अधिक सुदृढ़ कर अपने लोकतांत्रिक कर्तव्यों के साथ भारत को विश्वगुरु के रूप में स्थापित करने में अपना योगदान अवश्य दें।

सिक्किम के राज्यपाल लक्ष्मणाचार्य ने कहा कि लोकतंत्र में भारत के प्रत्येक व्यक्ति के लिए संवैधानिक अधिकार और कर्तव्य निर्धारित किए गए हैं। इसलिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है की राष्ट्र का प्रत्येक नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग होकर अपने नायक का चयन करे।

मुख्य वक्ता स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने सनातन के समक्ष खड़ी चुनौतियों पर चर्चा करते हुए भारत के वर्तमान परिवेश पर प्रकाश डाला। स्वामी जी ने कहा कि सनातन संस्कृति भारत की आत्मा, संत इसके संरक्षण के लिए हर बलिदान देंगे। इतिहास इस बात का गवाह है कि भारत की संप्रभुता और सनातन को जब भी किसी ने संकट में डालने की कोशिश की है, भारत की संत परंपरा ने उसका डट कर मुकाबला भी किया है और सनातन राष्ट्र को सुरक्षित रखने का कार्य किया है।

कार्यक्रम में शिवप्रताप शुक्ल, राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश, लक्ष्मण आचार्य, राज्यपाल, सिक्किम, स्वामी जीतेन्द्रानन्द सरस्वती, महामन्त्री अखिल भारतीय सन्त समिति , स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती , जगद्‌गुरु शंकराचार्य, सुमेरु पीठ, काशी , स्वामी शंकर पुरी जी महन्त मन्दिर, अन्नपूर्णा, महामण्डलेश्वर सन्तोष दास सतुआ बाबा, प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी, अध्यक्ष, श्रीकाशी विद्वत् परिषद् , श्रीमहन्त यमुनापुरी, श्रीमहन्त बालकदास, पातालपुरी मठ स्वामी विमलदेव आश्रम, अध्यक्ष, दण्डी संन्यासी प्रबन्धन समिति,पद्मश्री प्रो० नागेन्द्र पाण्डेय,पद्मश्री प्रो. के. के. त्रिपाठी , पद्मश्री पण्डित शिवनाथ मिश्र, पद्मश्री श्री रजनीकान्त जी, पद्मश्री चन्द्रशेखर सिंह,श्री जगजीतन पाण्डेय, अखिल भारतीय धर्मसंघ, प्रान्तप्रचारक रमेश जी सहित हजारों की संख्या में संत और विद्वतजन उपस्थित थे।

कार्यक्रम की शुरुआत रामेश्वर मठ के वैदिक छात्र, राष्ट्र सूक्त का पाठ कर किए। श्री काशी विश्वनाथ धाम के पण्डित श्रीकान्त मिश्र ने पौराणिक मंगलाचरण किया। कार्यक्रम का प्रस्तावना – डॉ० शुकदेव त्रिपाठी ने प्रस्तुत किया। सञ्चालन प्रो० रामनारायण द्विवेदी और धन्यवाद ज्ञापन आचार्य गोविन्द शर्मा ने किया।

इससे पूर्व बृजेश सिंह, पूर्व सदस्य विधान परिषद, सञ्जय तिवारी, अध्यक्ष, भारत संस्कृति न्यास, प्रो. विनय पाण्डेय, संगठन मन्त्री, श्रीकाशी विद्वत्परिषद् श्रीमती गीता शास्त्री, आनन्द पाण्डेय, कन्हैया सिंह , शशिभूषण, सच्चिदानन्द सिंह, विपिन सेठ, दीपक गिरि , साहिल सोनकर , शशि राय, पीयूष मिश्रा, आदेश भट्ट , एड.तुषार गोस्वामी, विनोद सिंह, उमाकान्त शर्मा जी
श्रीमती उषा सिंह परिहार, श्रीमती पूनम पाण्डेय, तारा प्रसाद कश्यप , धीरेन्द्र सिंह, प्रो. एम.के. श्रीवास्तव, पीयूष मिश्रा, देवेश अड़ीचवाल आशीष साहू और सतीश जैन ने माल्यार्पण कर अतिथियों का स्वागत किया।

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