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Lok Sabha Speaker Election: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ही उनकी कैबिनेट ने शपथ ले ली और उसके एक रोज बाद सभी को विभागों का बंटवारा भी कर दिया गया. इसके बाद सभी ने अपने चार्ज संभाले और सरकार काम करने लगी. लेकिन, इसी के साथ शुरू हुआ लोकसभा स्पीकर के नाम का सस्पेंस. अब इसे लेकर तारीख आ गई है. स्पीकर का चुनाव 26 जून को होगा. आइये इससे पहले जानें ये चुनाव कैसे होते हैं और स्पीकर के पास क्या पावर होती है.
लोकसभा चुनाव 2024 में NDA की जीत के बाद नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बन गए हैं. उनके साथ ही उनकी कैबिनेट के 30 साथियों ने शपथ ली. समारोह में 5 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और 36 राज्य मंत्रियों को शपथ दिलाई गई. इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को अकेली की बहुमत नहीं मिली ऐसे में शपथ के बाद ही सस्पेंस क्रिएट हो गया था कि अब लोकसभा स्पीकर कौन होगा और इसके चुनाव कब होंगे. इसे लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नोटिफिकेशन जारी करते हुए बताया है कि ये चुनाव 26 जून को कराए जाएंगे.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, 24 और 25 जून को प्रोटेम स्पीकर सभी चुने हुए नए सांसदों को शपथ दिलाएंगे. इसके बाद 26 जून को लोकसभा स्पीकर का चुनाव कराया जाएगा. फिर 27 तारीख दोनों सदनों को संयुक्त रूप से राष्ट्रपति संबोधित करेंगी. इसके बाद इसी दिन 11 बजे राष्ट्रपति का अभिभाषण होगा.
लोकसभा स्पीकर का पद
संविधान के आर्टिकल 93, 94, 95, 96 और 97 में लोकसभा स्पीकर, डिप्टी स्पीकर के चुनाव, कार्य, पदमुक्ती और ताकत से साथ अधिकारों के बारे में बताया गया है. स्पीकर का पद संवैधानिक है. इनके बिना लोकसभा की कार्रवाई संभव नहीं है. सांसदों को अपने बतौर गार्जियन स्पीकर और डिप्टी स्पीकर का चुनाव करना होता है. सदन की कार्रवाई सुचारू रूप से चले और संसद की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने की जिम्मेदारी स्पीकर पर होती है. ये सांसदों के मुखिया होते हैं.
स्पीकर का चुनाव
लोकसभा अध्यक्ष का निर्वाचन लोकसभा चुनावों के बाद प्रथम बैठक में ही कर लिया जाता है. संसद सदस्यों के बीच से किसी एक सांसद को पांच साल के लिए इस पद पर बैठाया जाता है. निर्वाचन की तिथि और समय राष्ट्रपति द्वारा निश्चित कर दी जाती है. इसके बाद इसकी जानकारी लोकसभा महासचिव सदस्यों को देते हैं. चुनाव से एक दिन पहले तक दल या सदस्य किसी सदस्य को चुने जाने का प्रस्ताव महासचिव को लिखित रूप में देते हैं.
सदस्य भी सदस्य को प्रस्तावित करने वाले प्रस्ताव में नामित उम्मीदवार का यह एफिडेविट होना चाहिए कि वो कार्य करने के लिए तैयार है. अगर एक ही प्रस्ताव आते हैं तो अध्यक्ष का चुनाव कराए जाते हैं. इसमें मतदान के लिए लोकसभा के सदस्य मतदान करते हैं. अध्यक्ष का कार्यकाल लोकसभा विघटन तक होता है. इनको पदमुक्त करने के लिए प्रभावी बहुमत की जरूरत होती है. हालांकि, इसके लिए प्रस्ताव 14 दिन पहले सदन को देनी होता है.
स्पीकर के कार्य और अधिकार
लोकसभा अध्यक्ष संसद के सत्रों की अध्यक्षता करत हैं. इनके निगरानी में सदन की कार्यवाही चलती है. अध्यक्ष ही तय करते हैं कि कोई विधेयक, धन विधेयक है या नहीं. वह सदन का अनुशासन बनाए रखने के साथ ही सांसदों के आधिकारों की रक्षा करते हैं. इतना ही नहीं स्पीकर के पास अधिकार होता है कि वो सांसदों को दंडित कर सकते हैं. सदन में आए किसी भी प्रस्ताव को अनुमति देना न देना इनका अधिकार है. अध्यक्ष ही सदन की बैठक में एजेंडा तय करते हैं.
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