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लखनऊ/संसद वाणी : केद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के फेक वीडियो मामले में सपा के लोकसभा प्रत्याशी लालजी वर्मा पर एफआईआर दर्ज हुई है. सपा ने वर्मा को अंबेडकरनगर सीट पर टिकट दिया है, दिल्ली में एफआईआर दर्ज होने के बाद आधी रात दिल्ली पुलिस लालजी वर्मा के घर पहुंची और नोटिस रिसीव कराया।
लालजी वर्मा ने नोटिस मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि बीजेपी विपक्षी नेताओं को डरा-धमकाकर गलत आचरण कर रही है. 28 अप्रैल को दिल्ली में दर्ज मामले में वर्मा पर अमित शाह का फेक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने का आरोप है.
पूर्वांचल के कद्दावर नेताओं में वर्मा की गिनती
बता दें कि लालजी वर्मा पूर्वांचल के कद्दावर नेताओं में शुमार हैं. करीब 35 साल से सियासत में सक्रिय वर्मा की क्षेत्र में अच्छी पकड़ है. यही कारण है कि अखिलेश यादव ने छह बार के विधायक लालजी वर्मा को प्रत्याशी बनाया. इसके साथ ही उन्होंने पूर्वांचल में पीडीए के समीकरण को साधने का भी प्रयास किया.
लालजी वर्मा का सियासी सफर
लालजी वर्मा की गितनी जमीनी और जुझारू नेताओं में होती है. पहली बार उन्होंने छात्र संघ का चुनाव लड़ा और महासचिव बने. 1986 में पहली बार विधान परिषद का चुनाव लड़े और जीत कर सदन पहुंचे. मगर, बीच में ही इस्तीफा देकर वो 1991 में पहली बार विधानसभा का। चुनाव लड़े और जीते.
टांडा से चार बार और दो बार कटेहरी से विधायक
लालजी वर्मा 1991, 1996, 2002, 2007, 2017 और 2022 में विधायक चुने गए. चार बार टांडा विधानसभा से और दो बार कटेहरी विधानसभा से विधायक रहे. 2007 में लालजी वर्मा बसपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे. वर्मा पहली बार 1997 में जेल राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बने. वहीं 2002 में सार्वजनिक उद्यम मंत्री बने थे.
राम अचल राजभर के साथ ज्वाइन की थी सपा
लालजी वर्मा 2022 विधानसभा चुनाव से पहले अपने पुराने साथी और राजभर समाज के कद्दावर नेता राम अचल राजभर के साथ सपा में शामिल हुए थे. इसके बाद सपा ने अंबेडकरनगर की पांचों विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी।
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