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तेहरान/वॉशिंगटन, 4 मार्च 2026:
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कई अमेरिकी और सहयोगी देशों के सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सैन्य व परमाणु ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए थे। इसके बाद क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया है और कई देशों में सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया है।
कई देशों में अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना
रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। हमले कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और सऊदी अरब जैसे देशों में स्थित अमेरिकी बेस और सैन्य सुविधाओं पर किए गए। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने कहा कि ये हमले “जवाबी कार्रवाई के पहले चरण” का हिस्सा हैं।
कुवैत में ड्रोन हमले में अमेरिकी सैनिकों की मौत
कुवैत के पोर्ट शुआइबा में स्थित एक अमेरिकी ऑपरेशन सेंटर पर हुए ड्रोन हमले में कम से कम 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई। हमले में एक अस्थायी सैन्य इमारत पूरी तरह नष्ट हो गई और जांच शुरू कर दी गई है।
खाड़ी देशों में दहशत, कई मिसाइलें रोकी गईं
सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों ने बताया कि कई मिसाइलों और ड्रोन को एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया। कुछ हमलों से इमारतों और सैन्य सुविधाओं को नुकसान पहुंचा, जबकि कई जगहों पर नागरिक क्षेत्रों में भी धमाके सुने गए।
तुर्की तक पहुंचा युद्ध का असर
संघर्ष का दायरा बढ़ते हुए तुर्की तक पहुंच गया, जहां नाटो रक्षा प्रणाली ने एक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल को मार गिराया। यह पहली बार है जब इस संघर्ष में किसी नाटो सदस्य के एयरस्पेस में मिसाइल पहुंची है।
अमेरिकी दूतावास और खुफिया ठिकाने भी निशाने पर
सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अमेरिकी दूतावास परिसर के अंदर स्थित सीआईए स्टेशन को भी ड्रोन हमले में नुकसान पहुंचा। हालांकि इस हमले में किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष अभी और तेज हो सकता है। अमेरिका ने अपने सैन्य ठिकानों की सुरक्षा बढ़ा दी है, जबकि कई देशों ने अपने नागरिकों को मिडिल ईस्ट क्षेत्र से दूर रहने की सलाह दी है।