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चार्कोप पुलिस का ‘कॉमेडी शो’: डोटम बिल्डर ने दिखाया लोअर परेल का 8 साल पुराना कागज, और पुलिस मान गई!

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मुंबई (जन कल्याण नगर): कहते हैं कानून के हाथ लंबे होते हैं, लेकिन कांदिवली के जन कल्याण नगर में डोटम बिल्डर (Dotom Builder) ने साबित कर दिया है कि उसके पास कानून की आंखों पर पट्टी बांधने का ‘जादुई चश्मा’ है। बिलाबोंग इंटरनेशनल स्कूल के पास चल रहे इस प्रोजेक्ट में जो तमाशा देखने को मिला, उसे सुनकर आप अपनी हंसी नहीं रोक पाएंगे।

1. बीएमसी का ‘स्टॉप वर्किंग’ नोटिस बना रद्दी!

वशिष्ठ वाणी की शिकायत के बाद बीएमसी ने डोटम बिल्डर को ‘स्टॉप वर्किंग’ का नोटिस थमाया। बीएमसी ने साफ कहा कि काम बंद करो और इसकी जानकारी SRA और चार्कोप पुलिस को भी दी। लेकिन बिल्डर ने शायद नोटिस को पढ़ा ही नहीं और काम रॉकेट की रफ्तार से जारी रखा।


2. लोअर परेल की अनुमति, चार्कोप में काम: पुलिस की ‘तेज’ नजरें!

जब वशिष्ठ वाणी ने पुलिस को काम रुकवाने के लिए बुलाया, तो डोटम बिल्डर ने एक ‘परमिशन लेटर’ दिखाया। अब इस लेटर का सच सुनिए:

तारीख: साल 2016 (8 साल पुराना!)

लोकेशन: लोअर परेल (Lower Parel) की अनुमति!हैरानी की बात यह है कि चार्कोप पुलिस ने इस लेटर को देखा और मान लिया कि बिल्डर को जन कल्याण नगर (मालाड/कांदिवली) में काम करने की अनुमति है। क्या पुलिस को यह नहीं दिखा कि कागज 8 साल पुराना और दूसरी जगह का है?


3. “आप खुद जाकर काम रुकवा दो” – पुलिस का अनोखा जवाब!

जब वशिष्ठ वाणी ने पुलिस की इस बड़ी गलती की ओर ध्यान दिलाया, तो पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय पत्रकार से ही कह दिया— “आप ही जाकर काम रुकवा दीजिए।” वाह! अगर जनता और पत्रकार ही काम रुकवाएंगे, तो पुलिस की वर्दी और खाकी का क्या काम?

4. 100 नंबर की कॉल और 30 मिनट का ‘ब्रेक’

जब मामला मुंबई पुलिस के 100 नंबर तक पहुंचा, तो दबाव में आकर चार्कोप पुलिस ने काम रुकवाया। लेकिन यह कोई सजा नहीं, बल्कि बिल्डर के लिए ‘चाय का ब्रेक’ निकला। पुलिस के जाते ही 30 मिनट के भीतर काम फिर से शुरू हो गया। इसके बाद ट्वीट होते रहे, शिकायतें होती रहीं, लेकिन कोई अधिकारी दोबारा मुड़कर नहीं आया।

सवाल जो जनता पूछ रही है:

  • क्या डोटम बिल्डर कानून से ऊपर है?
  • क्या चार्कोप पुलिस को गुमराह करना इतना आसान है कि 2016 का लोअर परेल का कागज 2026 के कांदिवली में चल जाता है?
  • आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि पुलिस बिल्डर पर सख्त कार्रवाई करने से कतरा रही है?

निष्कर्ष:

डोटम बिल्डर ने यह साबित कर दिया है कि वह न बीएमसी को मानता है, न SRA को, और न ही पुलिस की चेतावनियों को। प्रशासन की इस लापरवाही पर अब सोशल मीडिया पर लोग हंस रहे हैं और डोटम बिल्डर की मनमानी देखकर हैरान हैं।

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