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जंगल की जमीन को मुक्त कराने के लिए दूसरे दिन भी चला सीमांकन कार्य

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पुलिस से भिड़ी महिलाएं, किसान हिरासत में।


पिंडरा/संसद वाणी : तहसील के मानापुर में जंगल की जमीन को अवैध कब्जा से मुक्त कराने में पुलिस व तहसील प्रशासन को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। सीमांकन के दौरान कई बार पुलिस से झड़प हुई।
बताते चलें कि पिंडरा तहसील के मानापुर में 72 बीघा जमीन जंगल के नाम दर्ज थी। जिसे प्रशासन द्वारा खाली कराया जाने के पूर्व पूरे भूमि का सीमांकन 15 लेखपालों द्वारा किया जा रहा है। जबकि किसानों का कहना है कि चकबंदी के दौरान उनके नाम से चक काटा गया और बाकायदा उसकी खतौनी भी है। उसके बावजूद घर से बेघर किया जा रहा है। दूसरे दिन भूमि का सीमांकन करने पहुची राजस्व विभाग को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। यहाँ तक उनकी जरीब भी ग्रामीणों द्वारा चुरा लिया गया, घण्टे भर मिलने पर सीमांकन शुरू हो पाया लेकिन तभी महिलाएं आगे आ गई और विरोध करने लगी। महिलाओं के तेवर से एक बारगी पुलिस पीछे हटने लगी तभी महिला पुलिसकर्मियों ने मोर्चा संभाला और महिलाओं को एक तरफ किया तब जाकर सीमांकन शुरू हो पाया।

इसी बीच दूसरे दिन पुलिसकर्मियों से उलझने पर किसान सन्तोष पटेल को फिर पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। वही दूसरी तरफ लेखपाल सुशील कुमार ने ग्रामीणों के खिलाफ तहरीर भी दी लेकिन देर शाम तक कोई कार्रवाई पुलिस ने नही की।
वही दूसरे दिन भी तहसीलदार विकास पांडेय के नेतृत्व में पीएसी व पुलिस टीम तैनात रही । रविवार को भी सीमांकन कार्य चल सकता है। उक्त जमीन वाराणसी जौनपुर फोरलेन के किनारे है। जिसकी कीमत करोड़ो में है। उसी क्षेत्र में काशी द्वार के लिए अधिग्रहण की कार्रवाई भी की जानी है।

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