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आखिर क्यों गुजरातियों में मची है भारत छोड़ने की होड़, एक साल में दोगुने लोगों ने छोड़ा देश 

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Renouncing Citizenship:  गुजरात के लोगों ने हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में भारत की नागरिकता छोड़ी है. नागरिकता छोड़ने वालों की उम्र 30 से 45 साल के बीच है. विदेशों में बेहतर बुनियादी ढांचा और गुणवत्तापूर्ण जीवन जैसे कारक लोगों को अपनी नागरिकता का त्याग करने में अहम योगदान करते हैं.नागरिकता छोड़ने वाले अधिकांश लोग अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में बसे हैं.  

Gujrat News: गुजरात के रहने वाले उत्पल पटेल ने साल 2011 में पढ़ाई के लिए कनाडा गए थे. उन्होंने साल 2022 में वहां की नागरिकता हासिल कर ली और साल 2023 में भारतीय नागरिकता छोड़ दी. उत्पल अकेले ऐसे गुजराती नहीं हैं जिन्होंने भारत की नागरिकता छोड़ी है. उनकी तरह ही जनवरी 2021 से लेकर अब तक 1187 गुजराती लोगों ने अपनी नागरिकता त्याग दी है और विदेश में रहने लगे हैं. पटेल जैसे कई लोग प्रवासी लहर का हिस्सा बन गए हैं. 

क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय के डेटा जो गुजरात राज्य के मामलों को संभालता है का कहना है कि हाल के समय में गुजरातियों 

द्वारा अपने भारतीय पासपोर्ट त्यागने में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में  485 पासपोर्ट सरेंडर किए गए जो 2022 में त्यागे गए 241 पासपोर्ट की संख्या से दोगुनी है. मई 2024 की शुरुआत तक यह संख्या पहले 244 तक पहुँच चुकी है.अधिकारियों ने कहा कि छोड़े गए ज्यादातर पासपोर्ट 30-45 वर्ष की आयु के व्यक्तियों के थे. इनमें से अधिकांश लोग अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में बसे हुए थे.

कोविड के बाद बढ़ी पासपोर्ट सरेंडर की दर 

संसदीय डेटा के मुताबिक,  गुजरात के 22,300 लोगों ने 2014 और 2022 के बीच अपनी नागरिकता छोड़ी. इस प्रकार गुजरात देश में तीसरे स्थान पर है. दिल्ली में 60,414 और पंजाब में 28,117 लोगों ने अपनी नागरिकता छोड़ी है. कोविड के बाद पासपोर्ट सरेंडर करने वालों की संख्या में उल्लेखनीय रूप से वृद्धि हुई है. अहमदाबाद में क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी अभिजीत शुक्ला ने बताया कि महामारी के प्रतिबंधों के दो साल बाद दूतावासों को फिर से खोलना और नागरिकता प्रक्रियाओं को फिर से शुरू करना इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि कई युवा पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं और अंततः वहीं बस जाते हैं.  ऐसे छात्रों की बढ़ती संख्या पासपोर्ट सरेंडर करने की संख्या में वृद्धि में योगदान करती है.

क्यों छोड़ी भारतीय नागरिकता? 

रिपोर्ट के मुताबिक, कई व्यवसायी बेहतर बुनियादी ढांचे और जीवन की गुणवत्ता के लिए विदेश जा रहे हैं. यहां तक कि भारत में उच्च जीवन स्तर वाले लोग भी हरियाली की कमी और खराब ड्राइविंग स्थितियों जैसे मुद्दों के कारण विदेश जाना चाहते हैं. अहमदाबाद सहित गुजरात के कई शहर पैदल यात्रियों के अनुकूल नहीं हैं. पासपोर्ट सलाहकार रितेश देसाई ने कहा कि वीजा की तीन मुख्य श्रेणियां हैं स्टूडेंट वीजा, डायरेक्ट वीजा, बिजनेस वीजा के जरिए बड़ी संख्या में विदेश जाने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है. उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि 2028 तक पासपोर्ट सरेंडर करने वालों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी क्योंकि विदेश चले गए अधिक लोग अब अपनी विदेशी नागरिकता प्राप्त कर रहे हैं. 

पासपोर्ट सरेंडर का क्या है नियम

पासपोर्ट अधिनियम 1967 के अनुसार भारतीय पासपोर्ट धारकों को विदेशी राष्ट्रीयता प्राप्त करने के बाद अपने पासपोर्ट को सरेंडर करना चाहिए. यदि तीन साल के भीतर ऐसा किया जाता है, तो कोई जुर्माना नहीं है. हालांकि, तीन साल बाद 10,000 रुपये से 50,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.

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