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केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जारी होने के 5 साल बाद इस स्कीम को भुनाया जा सकता है.
सोने के कीमतों में आए भारी उछाल के बाद लोगों में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB)बेचकर मुनाफा कमाने की होड़ लग गई है. वे ऊंची कीमतों में SGB बेचकर मोटी कमाई करने की कोशिश में लग गए हैं. इसी बीच आरबीआई ने मैच्योरिटी से पहले SGB बेचने पर दी जाने वाली रकम तय कर दी है.आरबीआई ने यह रकम 2017-18 सीरीज की चौथी सीरीज और 2018-19 की दूसरी सीरीज के तहत सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के लिए तय की गई है.
प्रति यूनिट मिलेगी कितनी रकम
आरबीआई ने इन दो सीरीज के लिए प्रीमैच्योर रिडम्पसन प्राइस 7,325 प्रति यूनिट तय किया है. आरबीआई के अनुसार प्रीमेच्योर रिडम्पशन के लिए प्रति ग्राम सोने के हिसाब से 7325 रुपए दिए जाएंगे. आरबीआई ने 18,19 और 22 अप्रैल 2024 को सोने के बाजार भाव के हिसाब से यह कीमत तय की है.
निवेश के 5 साल बाद निकाल सकते हैं पैसा
भारत सरकार द्वारा 6 अक्टूबर 2017 और 8 अक्टूबर 2018 को जारी की गई नोटिफिकेशन के अनुसार मैच्योरिटी से पहले SGB को भुनाने अनुमति एसजीबी जारी किए जाने के 5 साल बाद की दी जाएगी.
बता दें कि इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन लिमिटेड (IBJA) द्वारा 999 शुद्धता वाले सोने की कीमत के आधार पर ही सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की कीमत तय की जाती है. चूंकि इस बार प्रीमेच्योर एसजीबी की डेट 23 अप्रैल 2024 है इसलिए इस बार 18,19 और 22 अप्रैल 2024 को IBJA में 999 शुद्धता वाले सोने की कीमतों के आधार पर ही एसजीबी की प्रत्येक यूनिट का रेट तय किया गया है.
पिछले हफ्ते आरबीआई ने एसजीबी 2017-18, सीरीज III को भुनाने की सुविधा प्रदान की थी, जिसके लिए प्रति यूनिट 7,260 रुपए फिक्स किए गए थे.
2015 में हुई थी स्कीम की शुरुआत
मोदी सरकार ने साल 2015 के नवंबर महीने में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम की शुरुआत की थी. इस योजना का उद्देश्य भौतिक सोने की खरीद में कमी लाना था. इस योजना के बाद भारत में सोने की भौतिक खरीद में कमी आई है.
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के निवेशकों को सोन में आई तूफानी तेजी का फायदा मिल रहा है. इससे पहले की सोने की कीमतें गिरें, उससे पहले ही वो SGB को भुनाने में लग गए हैं.
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