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मालाड: विनायक दुबे द्वारा अवैध डंपिंग पर BMC की चुप्पी, क्या अधिकारी सुनील पानसकर की मिलीभगत से मीडिया को किया जा रहा गुमराह?

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मुंबई: आर्थिक राजधानी के मालाड (पश्चिम) इलाके में नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे अवैध डंपिंग के खेल ने अब प्रशासनिक भ्रष्टाचार की ओर इशारा करना शुरू कर दिया है। जनकल्याण नगर स्थित शिव स्नेह परिसर में बिल्डर विनायक दुबे द्वारा की जा रही अवैध मलबे (Debris) की डंपिंग ने स्थानीय निवासियों का जीना दूभर कर दिया है, लेकिन उससे भी ज्यादा चौंकाने वाला रवैया बीएमसी (BMC) के पी/उत्तर विभाग के अधिकारियों का है।

अधिकारियों का दावा बनाम धरातल की सच्चाई

हाल ही में जब संसद वाणी की टीम ने इस मामले को लेकर पी/उत्तर विभाग के सहायक अभियंता (Assistant Engineer) सुनील पानसकर से जवाब मांगा, तो उन्होंने बड़े आत्मविश्वास के साथ कहा कि बिल्डर विनायक दुबे के काम को रोक दिया गया है और उन पर भारी जुर्माना भी लगाया गया है।

लेकिन जब टीम ने इस तथाकथित जुर्माने की रसीद (Fine Slip) मांगी, तो अधिकारी बगले झांकने लगे। 24 घंटे से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी अधिकारी जुर्माने का कोई भी कानूनी प्रमाण पेश नहीं कर पाए हैं। सूत्रों का दावा है कि बिल्डर पर असल में कोई कार्रवाई हुई ही नहीं है।

क्या कानून से बड़े हो गए हैं अधिकारी?

सवालों के घेरे में आए सुनील पानसकर के इस रवैये ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं:

  • क्या बीएमसी अधिकारी अब सरेआम मीडिया और जनता को गुमराह करने का काम कर रहे हैं?
  • क्या बिल्डर विनायक दुबे को अधिकारियों का इतना मजबूत संरक्षण प्राप्त है कि वे कागजी कार्रवाई का डर दिखाकर मामले को रफा-दफा करना चाहते हैं?
  • 50 से अधिक हायवा वाहनों की अवैध आवाजाही और उससे उड़ने वाली धूल क्या प्रशासन को दिखाई नहीं दे रही?

कमिश्नर अश्विनी भिड़े से जांच की मांग

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सम्राट बागुल ने इस अवैध डंपिंग के खिलाफ 08 मार्च 2025 और 19 अप्रैल 2026 को बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिड़े और सहायक आयुक्त कुंदन वळवी को सबूतों के साथ शिकायत दी थी। बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं दिखा।

अब जनता पूछ रही है कि क्या बीएमसी कमिश्नर इन अधिकारियों पर विजिलेंस जांच बैठाएंगी? क्या उन अधिकारियों पर गाज गिरेगी जो बिल्डर के साथ मिलीभगत कर सरकारी तंत्र का मजाक उड़ा रहे हैं?

“प्रशासन की चुप्पी यह संकेत दे रही है कि भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं। अगर जल्द ही विनायक दुबे और उसे बचाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन ही एकमात्र रास्ता बचेगा।”शिव सम्राट फाउंडेशन

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