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मुंबई। मालवणी, मुंबई की स्वप्नपूर्ति सोसाइटी में अवैध निर्माण और पार्किंग घोटाले के खिलाफ वशिष्ठ वाणी न्यूज और संसद वाणी की तीन साल की अथक मेहनत रंग लाई है। इस मामले में सोसाइटी और फेडरेशन के अध्यक्ष बालासाहेब भगत पर गंभीर आरोप हैं, जिनमें सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण, अवैध पार्किंग, और लोगों की जान से खिलवाड़ शामिल है। आपको बता दें कि वशिष्ठ मीडिया हाउस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक और दैनिक समाचार पत्र समूह के स्वामी अभिषेक अनिल वशिष्ठ ने इस घोटाले को उजागर करने और कार्रवाई की मांग में अहम भूमिका निभाई है।
- तीन साल की मुहिम और पहली जीत
अभिषेक अनिल वशिष्ठ को जब इस मामले की जानकारी मिली कि बालासाहेब भगत ने फेडरेशन बनाकर MHADA की खुली जमीन पर अवैध पार्किंग का धंधा शुरू किया है, तब से उन्होंने इसके खिलाफ एक जोरदार मुहिम शुरू की। इस दौरान उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन “सत्य कभी पराजित नहीं होता” के सिद्धांत पर अडिग रहते हुए, उन्होंने हार नहीं मानी। उनकी मेहनत का नतीजा यह रहा कि MHADA अधिकारियों ने फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव के खिलाफ नोटिस जारी करना शुरू किया और एक अवैध निर्माण को ध्वस्त किया गया।
बालासाहेब भगत पर निम्नलिखित गंभीर आरोप हैं:
1. अवैध संपत्ति अर्जन: एक ऑटो रिक्शा चालक होने के बावजूद, भगत ने 20-25 लाख रुपये के दो फ्लैट (नंबर 714) खरीदे और सोसाइटी का मेंटेनेंस शुल्क अग्रिम भरा, जो उनकी आय के स्रोतों के साथ संदिग्ध है।
2. अवैध पार्किंग: MHADA की खुली जमीन पर फेडरेशन बनाकर अवैध पार्किंग का संचालन, जिसके तहत वाहन मालिकों से गलत तरीके से शुल्क वसूला गया।
3. फंड का दुरुपयोग: एक सोसाइटी के अध्यक्ष ने सवाल उठाए है कि फेडरेशन द्वारा एकत्रित 33 लाख रुपये से अधिक के फंड का दुरुपयोग और “सामना मित्र मंडल” के जरिए ब्याज पर धन वितरण, जो मनी लॉन्ड्रिंग की संभावना को दर्शाता है।
4. लोगों की जान से खिलवाड़: अवैध पार्किंग और निर्माण के कारण सुरक्षा मानकों की अनदेखी, जिससे लोगों की जान को खतरा।
- MHADA और भ्रष्टाचार पर सवाल
हालांकि MHADA ने एक अवैध निर्माण को ध्वस्त किया, लेकिन कई अन्य अवैध निर्माण और पार्किंग गतिविधियों पर कार्रवाई नहीं हुई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन गंभीर आरोपों के बावजूद, MHADA अधिकारियों ने बालासाहेब भगत और फेडरेशन के सचिव के खिलाफ FIR दर्ज नहीं की। सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि MHADA के कुछ भ्रष्ट अधिकारी फेडरेशन को बचाने में संलिप्त हैं, जिससे पक्षपात का संदेह गहरा गया है।
अभिषेक अनिल वशिष्ठ ने हार नहीं मानी और इस मामले को सिविल कोर्ट में ले गए। उन्होंने MHADA अधिकारियों, बालासाहेब भगत, और फेडरेशन के अध्यक्ष व सचिव के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है। उनका सवाल है कि इतने गंभीर अपराधों के बावजूद FIR क्यों नहीं दर्ज की गई? यह मामला अब MHADA के अधिकारियों की जवाबदेही पर भी सवाल उठा रहा है।
स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग से निम्नलिखित मांगें की हैं:
1. बालासाहेब भगत की आय के स्रोतों और संपत्ति अर्जन की गहन जांच।
2. अवैध पार्किंग और फंड दुरुपयोग के मामले में PMLA और आयकर अधिनियम के तहत कार्रवाई।
3. MHADA के भ्रष्ट अधिकारियों की भूमिका की जांच और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई।
4. फेडरेशन के 33 लाख रुपये के फंड का ऑडिट।
वशिष्ठ वाणी न्यूज और संसद वाणी की मेहनत ने मालवणी स्वप्नपूर्ति सोसाइटी घोटाले को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अभिषेक अनिल वशिष्ठ की इस मुहिम ने न केवल एक व्यक्ति की संदिग्ध गतिविधियों को सामने लाया, बल्कि MHADA जैसे संस्थानों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर भी सवाल उठाए हैं। यह मामला अब जनता और मीडिया की नजरों में है, और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ED, आयकर विभाग, और MHADA इस मामले में पारदर्शी और त्वरित कार्रवाई करेंगे।
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