कानपुर (उत्तर प्रदेश) – पुलिस ने एक बड़े और संगठित फर्जी डिग्री रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जो कम से कम 9 राज्यों में सक्रिय था। यह गिरोह नकली अकादमिक दस्तावेज़, मार्कशीट और डिग्रियां बनाकर बेचता रहा है। पुलिस ने इस मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है और लगभग 900 से अधिक नकली दस्तावेज बरामद किए हैं।
रैकेट की कार्यप्रणाली
- गिरोह “शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन” नाम से किदवई नगर के एक कार्यालय से संचालित हो रहा था।
- यह संगठन 14 विश्वविद्यालयों के नाम पर नकली मार्कशीट, डिग्री और अन्य दस्तावेज़ तैयार कर रहा था।
- डिग्रियां हाई स्कूल से लेकर इंजीनियरिंग, बी.फार्मा और एलएलबी तक की थीं, जिनके लिए ग्राहकों से 50,000 से लेकर 2.5 लाख तक लिए जाते थे।
- कुछ मामलों में दस्तावेज़ों को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर भी फर्जी अपलोड किया गया था ताकि वे असली लगें।
पकड़े गए आरोपी
पुलिस ने चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है:
- शैलेंद्र कुमार – कथित मास्टरमाइंड और एम.एससी. पास गणित शिक्षक
- नागेंद्र मणि त्रिपाठी
- जोगेंद्र
- अश्वनी कुमार
इन सभी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और अन्य सहयोगियों की भी तलाश जारी है।
बरामद दस्तावेज़ और साक्ष्य
पुलिस ने छापेमारी में निम्नलिखित सबूत बरामद किए:
- लगभग 900 नकली मार्कशीट, डिग्रियां और अन्य दस्तावेज।
- पोस्ट-डेटेड चेक, नकली विश्वविद्यालय मुहर और अन्य बैंक से जुड़े साक्ष्य।
- कुछ मामलों में नकली दस्तावेज़ों का उपयोग कर 10 से अधिक व्यक्ति कानूनी पेशे में भी सक्रिय पाए गए हैं।
पुलिस अब इन दस्तावेज़ों की सत्यता संबंधित विश्वविद्यालयों से भी जांच रही है।
जांच का दायरा बढ़ा
कानपुर पुलिस ने एक 14-सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) भी गठित कर दी है। टीम में क्राइम ब्रांच अधिकारी, सब-इंस्पेक्टर्स और सहायक कमिश्नर शामिल हैं, जो रैकेट के पूरे नेटवर्क, आरोपी के बैंक खातों और विश्वविद्यालय के कर्मचारी सहयोगियों की जांच करेंगे।
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
इस बड़े घोटाले ने शिक्षा व्यवस्था में मौजूद भ्रष्टाचार और कमजोर सत्यापन तंत्र पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। अधिकारियों का इन दस्तावेज़ों का उपयोग कर सरकारी और निजी क्षेत्रों में नौकरी पाने वाले लोगों की जांच भी जारी है।