Bollywood News: बॉलीवुड के ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र देओल की मौत की अफवाह ने न सिर्फ लाखों फैंस के दिलों को तोड़ा, बल्कि पूरे मीडिया जगत को शर्मसार भी कर दिया। लेकिन सच्चाई सामने आने पर सवाल उठने लगे—क्या हमारे बड़े मीडिया हाउस अब ‘फेक न्यूज’ को ब्रेकिंग न्यूज बना देने की होड़ में इतने अंधे हो चुके हैं कि बिना पुष्टि के किसी लीजेंड को ‘मार’ डालें? या फिर ये सब TRP की भूख मिटाने का ‘एक्सक्लूसिव’ तरीका है? एक छोटे मीडिया के तौर पर हम ये सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि बड़े चैनलों के पास तो सरकारी विज्ञापनों की लंबी कतार लगी रहती है, फिर भी सनसनीखेजी के लिए वे किसी भी हद तक गिर जाते हैं।
अफवाह की शुरुआत: सोशल मीडिया से चैनलों तक का ‘वायरल’ सफर
11 नवंबर 2025 की सुबह, जब देश सोकर उठा तो स्क्रीन्स पर चमक रही थीं—’धर्मेंद्र का निधन! 89 वर्षीय दिग्गज अभिनेता ने अंतिम सांस ली!’। बड़े न्यूज चैनलों ने बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के ये खबरें चला दीं। कुछ ने तो ‘सूत्रों’ का हवाला देते हुए ओबीचुअरी तक तैयार कर ली। लेकिन असलियत? धर्मेंद्र जी मुंबई के ब्रेच कैंडी हॉस्पिटल में इलाजरत थे, वेंटिलेटर पर थे, लेकिन जिंदा और रिकवर कर रहे थे।
हमारी टीम ने सबसे पहले X (पूर्व ट्विटर) पर हेमा मालिनी (@dreamgirlhema) का प्रोफाइल चेक किया—कुछ नहीं। फिर सनी देओल (@iamsunnydeol) का—वहां भी सन्नाटा। लेकिन बड़े मीडिया ने इंतजार कहां किया? सुबह होते ही चैनलों ने हेडलाइंस थोकने शुरू कर दिए। हम सोच में पड़ गए—इतने बड़े नाम वाले मीडिया तो ‘फैक्ट-चेक’ के नाम पर लेक्चर देते हैं, फिर बिना डॉक्टर या परिवार की पुष्टि के ये जल्दबाजी क्यों? क्या ‘पहले ब्रेक करने’ की रेस में सच्चाई कहीं पीछे छूट गई?
परिवार का दर्द: ‘अनफॉरगिवेबल’ और ‘इर्रिस्पॉन्सिबल’
दोपहर होते-होते परिवार ने कदम उठाया। हेमा मालिनी ने X पर पोस्ट किया: “ये क्या हो रहा है, ये अनफॉरगिवेबल है! कैसे जिम्मेदार चैनल इलाजरत व्यक्ति के बारे में झूठी खबर फैला सकते हैं? वो रिकवर कर रहे हैं, परिवार को प्राइवेसी दो।”
बेटी ईशा देओल ने इंस्टाग्राम पर लिखा: “मीडिया ओवरड्राइव में है और झूठी खबरें फैला रहा है। पापा स्टेबल हैं और रिकवर कर रहे हैं। प्लीज, स्पेकुलेशन बंद करो।”
सनी देओल की टीम ने बयान जारी किया: “झूठी अफवाहें फैलाना असंवेदनशील है। प्रार्थना करो, अफवाहें मत।” ये सिर्फ खबर नहीं, परिवार का दर्द था। क्या बड़े मीडिया को इतना भी अहसास नहीं कि ऐसी खबरें लाखों फैंस को शोक में डुबो देती हैं? जावेद अख्तर जैसे दिग्गज तक फंस गए, शोक संदेश पोस्ट कर डाला। भग्यश्री को माफी मांगनी पड़ी। और हां, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तक की पोस्ट डिलीट करनी पड़ी!
कटाक्ष: TRP के ‘ही-मैन’ बन गए मीडिया, सच्चाई को ‘मार’ डालते हैं!
बड़े मीडिया को देखकर लगता है जैसे वे ‘शोले’ के वीरू-जय बनने की बजाय ‘गब्बर’ की भूमिका निभा रहे हों—बिना सोचे-समझे ‘कट’ कर देते हैं! सरकारी विज्ञापनों से मोटा पैसा आता है, संसाधन सस्ते नहीं, फिर भी TRP के लालच में बिना सत्यापन के खबर चला देते हैं। क्या ये ‘रिस्पॉन्सिबल जर्नलिज्म’ है या ‘रिस्पॉन्सिबल’ शब्द को ‘रिसाइकिल’ कर दिया?
छोटे मीडिया जैसे हम, बिना निवेशकों के संघर्ष करते हैं, लेकिन सच्चाई पर अडिग रहते हैं। बड़े वाले? वे तो ‘एक्सक्लूसिव’ के नाम पर ‘एक्सक्लूसिव झूठ’ परोसते रहते हैं। X पर मीम्स की बाढ़ आ गई—’धर्मेंद्र जी अस्पताल में लेटे TV देख रहे हैं, अपनी ही मौत की खबर!’ शर्मिंदगी तो बनती है!
सच्चाई की जीत: धर्मेंद्र जी अब घर पर रिकवर कर रहे
अब खुशखबरी—धर्मेंद्र जी को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। घर पर रेस्ट कर रहे हैं, स्टेबल हैं। उनके फैंस के प्यार और प्रार्थनाओं का कमाल। लेकिन ये घटना सबक है—फेक न्यूज के जाल में न फंसें। हम छोटे मीडिया वाले वादा करते हैं: सच्चाई पहले, सनसनी बाद में। बड़े भाइयों, कब सीखोगे?

