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वाराणसी/संसद वाणी : बीस वर्ष पुराने बीएचयू के सुरक्षा कर्मियों से मारपीट के 20 वर्ष पुराने मामले में पूर्व पार्षद वरुण सिंह सहित चार अभियुक्तों को एसीजेएम तृतीय पवन कुमार सिंह ने अभियोजन द्वारा जिन गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया उन्होंने अभियोजन के कथानक का समर्थन नहीं करने के कारण मुकदमे से बरी कर दिया।
बताते चले कि बीएचयू में सुरक्षा कर्मियों द्वारा टहलने से आमजन को रोकने की वजह से आंदोलन हुए बाद में सुरक्षा कर्मियों द्वारा पूर्व पार्षद वरुण सिंह सहित 2 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा लंका थाने में लिखवाया था। विवेचना में राजेंद्र सिंह लहरी को भी बतौर अभियुक्त मुलजिम बनाया गया था। अभियुक्तों की तरफ से अधिवक्ता हरिशंकर मिश्रा “मंचल” ने जोरदार तरीके से पक्ष रखा।
वादी मुकदमा रामावतार द्वारा लगाए गए आरोप जिरह में साबित नहीं हो सका अन्य गवाहों ने भी आरोप का समर्थन नहीं किया जिस पर न्यायाधीश पवन कुमार सिंह (एसीजेएम तृतीय) ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
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