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राजनीति

इमरान प्रतापगढ़ी का जोरदार भाषण:पीएम मोदी से कहा – “नेहरू को गाली देने से पहले 3,259 दिन जेल में गुजारने का इतिहास पढ़ लीजिए”

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Politics News: राज्यसभा में बुधवार को कांग्रेस सांसद एवं प्रसिद्ध शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे संबोधित करते हुए जवाहरलाल नेहरू के स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए बलिदान को याद दिलाया। सदन में अपने भावपूर्ण भाषण के दौरान इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि नेहरू परिवार ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया और अंग्रेजी हुकूमत की जेलों में कठोर यातनाएं सहीं।

नेहरू की जेल यात्राओं का विस्तृत ब्योरा

इमरान प्रतापगढ़ी ने नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एवं लाइब्रेरी के आधिकारिक अभिलेखों का हवाला देते हुए बताया कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कुल नौ बार जेल यात्रा की और ब्रिटिश शासन के दौरान कुल 3,259 दिन (लगभग 9 वर्ष) कारावास में बिताए।

  • पहली जेल यात्रा: 6 दिसंबर 1921
  • अंतिम जेल यात्रा: 1942-1945 (क्विट इंडिया आंदोलन के दौरान अहमदनगर किले में लंबी सजा)
  • कुल जेल अवधि: 3,259 दिन (1,042 दिन नैनी जेल, 879 दिन देहरादून, 743 दिन अहमदनगर किला आदि सहित)

उन्होंने कहा, “माननीय प्रधानमंत्री जी! पिछले 11 साल से आप और आपके सहयोगी नेहरू जी को लगातार गाली दे रहे हैं। एक बार उनकी किताबें तो पढ़ लीजिए। उनके पिता मोतीलाल नेहरू ने वकालत, कोठी, गाड़ी सब छोड़ दिया। बेटी इंदिरा गांधी ने भी जेल की सलाखों के पीछे वक्त गुजारा। पूरा परिवार देश पर कुर्बान हो गया।”

सदन में गूंजे तालियां, सोशल मीडिया पर वायरल

इमरान प्रतापगढ़ी का यह भाषण जैसे ही खत्म हुआ, विपक्षी खेमे से जोरदार तालियां बजीं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने सांसद को बधाई दी। वीडियो क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर तेजी से वायरल हो गया। कुछ ही घंटों में इसे लाखों लोग देख चुके हैं और हैशटैग #NehruInJail, #ImranPratapgarhi तथा #JawaharlalNehru ट्रेंड करने लगे।

दो धड़े, दो प्रतिक्रियाएं

  • कांग्रेस समर्थक इसे नेहरू के बलिदान की याद और वर्तमान सरकार पर करारा प्रहार बता रहे हैं।
  • दूसरी ओर, कुछ यूजर्स जेल में नेहरू को मिली सुविधाओं (पुस्तकें, लिखने का सामान, निजी नौकर आदि) का जिक्र कर रहे हैं और पुराने विवादास्पद आरोपों को दोहरा रहे हैं।

राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने भाषण के दौरान व्यवस्था बनाए रखी और सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाई। यह घटना एक बार फिर देश की राजनीति में नेहरू की विरासत को लेकर चल रही बहस को गरमा गई है।

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