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भारत-रूस संबंध: ‘हमारे रिश्तों पर किसी तीसरे देश को वीटो का अधिकार नहीं’ – एस. जयशंकर

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नई दिल्ली – रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हालिया भारत दौरे के तुरंत बाद, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए भारत और रूस के द्विपक्षीय संबंधों की संप्रभु प्रकृति पर ज़ोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत और रूस के रिश्तों पर किसी तीसरे देश को वीटो का अधिकार नहीं है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में विभिन्न शक्तियों के बीच तनाव मौजूद है और भारत अपने विदेश नीति के विकल्पों को लेकर बाहरी दबाव का सामना कर रहा है।


द्विपक्षीय संबंधों की मज़बूती

विदेश मंत्री जयशंकर का यह बयान भारत-रूस साझेदारी की दीर्घकालिक और गहरी जड़ों को रेखांकित करता है। यह रिश्ता दशकों से चला आ रहा है और यह केवल रक्षा आपूर्ति तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा, अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी और अंतर-सरकारी सहयोग के व्यापक क्षेत्रों को कवर करता है।

  • रणनीतिक स्वायत्तता: जयशंकर ने प्रभावी रूप से यह संदेश दिया है कि भारत अपनी विदेश नीति के निर्णय राष्ट्रीय हितों के आधार पर लेता है, न कि किसी अन्य देश की प्राथमिकताओं से प्रभावित होकर।
  • पुतिन की यात्रा का महत्व: रूसी राष्ट्रपति पुतिन की यात्रा ने दोनों देशों के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन के प्रारूप को बनाए रखा, जो इस साझेदारी की निरंतरता और महत्व को दर्शाता है। इस दौरान कई रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

स्पष्ट संदेश: ‘तीसरे पक्ष का वीटो नहीं’

विदेश मंत्री का यह बयान परोक्ष रूप से उन पश्चिमी देशों और समूहों की ओर इशारा करता है जो रूस के साथ भारत के रक्षा और व्यापार संबंधों पर चिंता व्यक्त करते रहे हैं। विशेष रूप से, S-400 वायु रक्षा प्रणाली जैसे बड़े रक्षा सौदों को लेकर अमेरिका ने CAATSA (काउंटरिंग अमेरिका’ज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शन्स एक्ट) के तहत प्रतिबंध लगाने की संभावना जताई थी।

जयशंकर के शब्दों ने भारत की संप्रभुता और अपनी रक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के अधिकार को दृढ़ता से स्थापित किया है। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच संबंध आपसी विश्वास, सम्मान और साझा हितों पर आधारित हैं, और इन्हें किसी बाहरी कारक द्वारा प्रभावित या निर्देशित नहीं किया जा सकता है।


भविष्य की दिशा

यह बयान आधुनिक भारतीय विदेश नीति के एक महत्वपूर्ण पहलू को दर्शाता है—वह है बहु-ध्रुवीय विश्व में संतुलन की नीति। भारत एक ओर अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को मज़बूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वह अपने पारंपरिक और भरोसेमंद सहयोगी रूस के साथ भी घनिष्ठ साझेदारी बनाए हुए है।

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