28 फ़रवरी 2026 — ईरान ने रविवार को मध्य पूर्व के आठ से अधिक देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया, जिससे क्षेत्र में संघर्ष एक बड़े युद्ध की ओर बढ़ता दिख रहा है।
यह पलटवार अमेरिका और इस्रायल के संयुक्त हमलों के बाद आया, जिनमें तेहरान में महत्वपूर्ण सरकारी व सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागी गई थीं। दोनों पक्षों के बीच हुए इन हमलों ने पहले से ही नाजुक स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
हमले की रूपरेखा
- ईरान ने कम से कम 7 से अधिक अमेरिकी सैन्य अड्डों पर बैलेस्टिक मिसाइलों और ड्रोन हमले किए, जिनमें अल-उदईद (कतर), अल-धफ़रा (यूएई), अली अल-सालेम (कुवैत) और बहरीन में अमेरिकी नौसेना का 5th फ़्लीट बेस शामिल हैं।
- मिसाइल हमलों को खाड़ी देशों में कई स्थानों पर इंटरसेप्ट किया गया, लेकिन कुछ जगहों पर नुकसान होने और नागरिक हताहत होने की रिपोर्टें आई हैं।
- ईरानी विदेश मंत्री ने इसे “स्व-रक्षा” बताया और चेतावनी दी कि सभी अमेरिकी और इस्राइली हित क्षेत्र लक्ष्य बने हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ
- रूस ने संयुक्त राज्य और इस्राइल के हमलों की कड़ी निंदा की है, इसे “अकारण आक्रमण” कहा और संघर्ष की व्यापकता की चेतावनी दी।
- सऊदी अरब और खाड़ी के अन्य देशों ने ईरानी हमलों की निंदा करते हुए अपनी सुरक्षा और सहयोग का आश्वासन दिया है।
- संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने युद्धविराम का आह्वान करते हुए घातक मानवाधिकार और आर्थिक परिणामों पर चिंता व्यक्त की है।
संयुक्त राज्य अमेरिका की स्थिति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने देश की सुरक्षा की रक्षा करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के उद्देश्य से संयुक्त सैन्य अभियान की घोषणा की है। उन्होंने ईरानी सरकार के खिलाफ कड़ी नीति अपनाने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
क्षेत्रीय संकट का खतरा
विश्लेषकों का मानना है कि इस संघर्ष का विस्तार केवल सैन्य मोर्चे तक नहीं रहेगा — इससे तेल आपूर्ति प्रभावित होने, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।
मध्य पूर्व के लिए यह सबसे गंभीर सैन्य गतिरोधों में से एक माना जा रहा है, और विश्व समुदाय संघर्ष को डिप्लोमैटिक समाधान की दिशा में ले जाने का आग्रह कर रहा है।