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पटना

बिहार में दलितों की स्थिति पर नई रिपोर्ट से खुलासा, 62% अशिक्षित और 63% बेरोजगार

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Bihar Election 2025: राष्ट्रीय दलित और आदिवासी संगठनों के कंफेडरेशन (NACDAOR) की नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बिहार में दलितों की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है, भले ही राज्य में विकास के दावे किए जा रहे हों। रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में 62% दलित अशिक्षित हैं और 63% बेरोजगार।

रिपोर्ट में 25 जिलों, जिसमें पटना, गया, मुजफ्फरपुर और दरभंगा शामिल हैं, के 18,581 दलित परिवारों से सीधे बातचीत के आधार पर यह तथ्य सामने आए हैं। NACDAOR के अध्यक्ष अशोक भारती ने कहा, “बिहार में हर पांचवां व्यक्ति दलित है, फिर भी उनके मुद्दे चुनावी बहस में जगह नहीं पाते।”

रिपोर्ट में शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, भूमि अधिकार और दलितों के खिलाफ अत्याचार जैसे मुद्दों की भी जांच की गई है। भारती ने सवाल उठाया, “जब बिहार में हर पांचवां व्यक्ति दलित है, तो नीतीश कुमार के तथाकथित अच्छे शासन में उनके लिए कोई जगह क्यों नहीं है?”

राष्ट्रीय मुसहर परिषद के उमेश मांझी ने भी राज्य की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “लालू प्रसाद यादव के शासनकाल में हमें घर मिले और अपनी आवाज उठाने की ताकत भी मिली, लेकिन आज ‘विकास’ के नाम पर सरकार ने हज़ारों दलितों के घर बिना किसी पुनर्वास के तोड़ दिए हैं। दिसंबर में मेरा अपना घर भी तोड़ दिया गया और कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। आज हम सभी सड़क किनारे झुग्गियों में रह रहे हैं।”

इस स्थिति को बदलने के लिए तेजस्वी यादव ने वादा किया है कि उनकी सरकार आने पर भूमिहीन लोगों को गांव में 5 डिसमिल और शहर में 3 डिसमिल जमीन दी जाएगी। साथ ही, हर घर में नौकरी देने की व्यवस्था होगी। उन्होंने कहा, “सरकार का बदलाव होगा, तभी समाज में बदलाव होगा।”

यह पोस्ट बिहार में आगामी चुनावों से पहले दलितों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की कोशिश है, जहां राजनीतिक ध्रुवीकरण और सामाजिक न्याय की मांगें प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।

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