कोलकाता: आज, 25 नवंबर 2025 से, दुनिया के सबसे बड़े मैंग्रोव वन – सुंदरबन – में एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान का आगाज़ हो रहा है। यह सिर्फ एक सर्वे नहीं है, बल्कि यह उस अदृश्य शक्ति को महसूस करने की एक संवेदनशील यात्रा है जो इस दलदली जंगल के दिल में धड़कती है: ‘रॉयल बंगाल टाइगर’।
क्यों खास है यह अभियान?
सुंदरबन, अपनी रहस्यमयी खाड़ियों और ज्वार-भाटे की लय के साथ, हमेशा से ही जीवन और संघर्ष की एक महागाथा रहा है। यहां का बाघ सिर्फ एक वन्यजीव नहीं, बल्कि भारतीय प्रकृति का गौरव और इस अनोखे पारिस्थितिकी तंत्र का अंतिम संरक्षक है।
यह राष्ट्रीय बाघ गणना (हर चार साल में होने वाला राष्ट्रीय बाघ अनुमान) इस बात का आईना होगी कि हमारे संरक्षण प्रयास कितने सफल रहे हैं।
- आशा और उत्साह: वन विभाग के जवान, जो इस दुर्गम क्षेत्र को अपनी हथेली की तरह जानते हैं, आज से लगभग 4,000 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में कैमरा ट्रैप लगाने का काम शुरू करेंगे। यह काम 30 नवंबर तक चलेगा। हर कैमरे का इंस्टॉलेशन एक उम्मीद है कि वह हमें हमारे ‘गोपनीय राजा’ की झलक दिखाएगा।
- वैज्ञानिक सटीकता: इस बार, डेटा संग्रह के लिए एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया जा रहा है, जो बाघों और उनके शिकार प्रजातियों (हिरण, जंगली सूअर) की सटीक जानकारी तुरंत केंद्र तक पहुंचाएगा। यह आधुनिक तकनीक सुंदरबन के संरक्षण के लिए एक नए युग की शुरुआत है।
जंगल की चुप्पी में छिपा भविष्य
जब वनकर्मी इन मैंग्रोव की जड़ों के बीच, कीचड़ से सने रास्तों पर चलते हैं, तो वे सिर्फ आंकड़े नहीं जुटा रहे होते। वे इस बात का पता लगा रहे होते हैं कि क्या बाघों को पर्याप्त शिकार मिल रहा है, क्या उनका निवास स्थान सुरक्षित है। यह गणना केवल संख्या नहीं, बल्कि जंगल की ‘सेहत की रिपोर्ट’ है।
“सुंदरबन में हर बाघ का अस्तित्व, इस धरती पर जलवायु परिवर्तन से लड़ने की हमारी क्षमता को दर्शाता है। हम सिर्फ एक जानवर को नहीं गिन रहे; हम एक विरासत को बचा रहे हैं।”
इस अभियान के दौरान, 11 और 12 दिसंबर को खाड़ियों के किनारे ‘साइन सर्वे’ (जानवरों के निशानों का पता लगाना) भी किया जाएगा, जिसके लिए पर्यटन को अस्थायी रूप से रोका गया है। यह अस्थायी चुप्पी बाघों को एक सुरक्षित और निर्बाध माहौल देगी, ताकि वे अपने राज्य में बेफिक्र होकर घूम सकें।
हम उम्मीद करते हैं कि यह सर्वे रॉयल बंगाल टाइगर के लिए और भी उज्जवल भविष्य की नींव रखेगा। पूरे देश की निगाहें सुंदरबन के इस महाअभियान पर टिकी हैं, जहां साहस और संरक्षण का यह अद्भुत संगम आज से शुरू हो रहा है।

