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नई दिल्ली | 3 जनवरी 2026
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) दिवस के अवसर पर देश के रक्षा वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने स्वदेशी रक्षा तकनीक में हासिल की गई उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने हाल ही में किए गए ‘प्रलय’ मिसाइल के सफल परीक्षण को भारत की वैज्ञानिक क्षमता और आत्मनिर्भर रक्षा नीति का सशक्त उदाहरण बताया।
स्वदेशी तकनीक की बड़ी उपलब्धि
रक्षा मंत्री ने कहा कि ‘प्रलय’ जैसी उन्नत मिसाइल प्रणालियां भारत की डिटरेंस क्षमता को मजबूती देती हैं और बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में देश को रणनीतिक बढ़त प्रदान करती हैं। यह परीक्षण उच्च सटीकता, विश्वसनीयता और आधुनिक मार्गदर्शन प्रणालियों की पुष्टि करता है।
वैज्ञानिकों के योगदान की सराहना
अपने संदेश में उन्होंने DRDO के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी स्टाफ की प्रतिबद्धता को नमन करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता सुनिश्चित करने में उनका योगदान अतुलनीय है। उन्होंने युवाओं से विज्ञान, अनुसंधान और रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे आने का भी आह्वान किया।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम
रक्षा मंत्री ने दोहराया कि सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न के तहत स्वदेशी अनुसंधान, डिज़ाइन और उत्पादन को प्राथमिकता दे रही है। DRDO की परियोजनाएं न केवल सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को पूरा कर रही हैं, बल्कि भारत को उन्नत रक्षा तकनीक के वैश्विक मानचित्र पर भी सशक्त बना रही हैं।