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कर्नाटक में सीएम बदलने और डिप्टी सीएम बढ़ने की मांग जोर पकड़ रही है. कांग्रेस पार्टी के भीतर ही इसे लेकर अंदरुनी कलह मची हुई है. पार्टी के नेता इसे लेकर बेहद परेशान हैं. अब डीके शिवकुमार ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस पर कोई चर्चा न हो. अगर कोई ऐसा करता है तो इसे पार्टी के आदेश का उल्लंघन माना जाएगा.
कार्नाटक के डिप्टी सीएम शिवकुमार ने पार्टी के हित में पार्टी के लोगों से अपना मुंह बंद रखने का आग्रह किया और साथ ही संतों से राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का अनुरोध भी किया है. शिवकुमार ने पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं और नेताओं को इस मुद्दे पर बयानबाजी करने से बचने के लिए कहा, साथ उन्होंने कहा कि जो भी इस बात को नहीं मानेंगे या ऐसा वैसा कोई स्टेटमेंट देंगे तो उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
शिवकुमार के इस बात पर काउंटर क्वेश्चन करते हुए मंत्री के एन राजन्ना ने कहा, ‘सवाल पूछने में गलत क्या है’. इतना ही नहीं राजन्ना ने कहा वह चेतावनियों पर ध्यान नहीं देते.
डीके शिवकुमार ने दी कार्यकर्ताओं को वॉर्निंग
कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलने की संभावनाओं और तीन उपमुख्यमंत्री बनाने की मांग को लेकर कांग्रेस पार्टी के भीतर और बाहर बहस छिड़ी हुई है. कुछ पार्टी पदाधिकारी सार्वजनिक रूप से तीन अतिरिक्त डिप्टी सीएम पदो पर जोर दे रहे हैं. इस बीच शिवकुमार ने कहा, ‘मल्लिकार्जुन खड़गे, सिद्वारमैया और मैंने तय किया है कि कैसा और क्या काम करना है, इसलिए किसी विधायक या मंत्री या स्वामीजी को बोलने की कोई जरूरत नहीं है और अगर किसी ने बोलने की या इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की तो उन पर कार्रवाई होगी.’
‘मैं चेतावनियों पर ध्यान नहीं देता..’
इस पर राजन्ना ने पलटवार करते हुए कहा, ‘मैं चेतावनियों पर ध्यान नहीं देता, नोटिस जारी होने दें, मैं इसका जवाब दूंगा. अगर सभी इसका पालन करेंगे, तो हम भी इसका पालन करेंगे. अगर सब चुप रहेंगे तो हम भी चुप रहेंगे. क्या हम यह सुनकर चुप रह सकते हैं कि कोई कहे कि सिद्धारमैया को सीएम पद से इस्तीफा देकर शिवकुमार को सीएम बना देना चाहिए’.?
’33 मंत्रियों का नाम शामिल…’
वहीं इस मुद्दे पर शिवकुमार के भाई और पूर्व सांसद डीके सुरेश ने भी चुप्पी तोड़ते हुए कहा, ‘सिद्धारमैया के मंत्रिमंडल में सभी 33 मंत्रियों का नाम शामिल है उसमें एक या दो को डिप्टी सीएम के रूप में नियुक्त किया जा सकता है और अगर मंत्रिमंडल में शिवकुमार के आलोचकों को सत्ता की इतनी इच्छा है तो उन्हें उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ना चाहिए, बहुमत हासिल करना चाहिए, और फिर जो भूमिका दी जाएगी, उसे निभाना चाहिए’.
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