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हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 60 वर्ष तक सेवा का अधिकार

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नई दिल्ली | 30 दिसंबर 2025

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हित में हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 60 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने का पूर्ण अधिकार है और उन्हें इससे पहले सेवानिवृत्त करना नियमों के विपरीत माना जाएगा।

क्या है पूरा मामला

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई थी कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को अन्य सरकारी कर्मचारियों की तुलना में कम सेवा अवधि दी जा रही है, जो समानता के अधिकार का उल्लंघन है। इस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि जब अन्य श्रेणियों के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष निर्धारित है, तो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के साथ अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता।

अदालत की अहम टिप्पणी

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि

  • चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी सरकारी सेवा का अभिन्न हिस्सा हैं।
  • उन्हें कम सेवा अवधि देना संवैधानिक समानता के सिद्धांत के खिलाफ है।
  • सेवानिवृत्ति आयु में भेदभाव न केवल अनुचित है, बल्कि कर्मचारी मनोबल पर भी नकारात्मक असर डालता है।

कर्मचारियों में खुशी की लहर

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों में खुशी और राहत का माहौल है। कर्मचारी संगठनों ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए कहा कि इससे हजारों कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षा मिलेगी और आर्थिक स्थिरता भी बनी रहेगी।

सरकार पर क्या असर पड़ेगा

इस फैसले के बाद राज्य सरकारों और संबंधित विभागों को अपने सेवा नियमों में संशोधन करना पड़ सकता है। साथ ही, जिन कर्मचारियों को पहले 60 वर्ष से पहले सेवानिवृत्त किया गया है, उनके मामलों की भी दोबारा समीक्षा होने की संभावना है।

निष्कर्ष

हाई कोर्ट का यह फैसला न सिर्फ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए राहत भरा है, बल्कि यह सरकारी सेवा में समान अधिकार और न्याय की दिशा में एक मजबूत कदम भी माना जा रहा है। आने वाले समय में यह निर्णय अन्य राज्यों और विभागों के लिए भी मिसाल बन सकता है।

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