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मिडिल ईस्ट युद्ध का असर भारत पर भी – गैस आपूर्ति, निर्यात और बाजारों पर बढ़ा दबाव

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नई दिल्ली, 10 मार्च 2026: मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य संघर्ष का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। पश्चिम एशिया से आने वाली तेल और गैस आपूर्ति में व्यवधान, निर्यात में देरी और शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव जैसी स्थितियां सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संघर्ष लंबा चला तो भारत में महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

गैस आपूर्ति पर असर

मिडिल ईस्ट संघर्ष के कारण भारत को मिलने वाली एलएनजी (Liquefied Natural Gas) की आपूर्ति प्रभावित हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत की लगभग 40% गैस आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है, जिसके चलते सरकार गैस वितरण के लिए नया “ऑप्टिमाइजेशन प्लान” तैयार कर रही है।

कुछ क्षेत्रों में गैस कंपनियों को गैर-जरूरी उद्योगों की आपूर्ति कम करके उर्वरक, बिजली और घरेलू उपयोग जैसे प्राथमिक क्षेत्रों को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए हैं।

तेल और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी

मिडिल ईस्ट दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा केंद्रों में से एक है। युद्ध के कारण कई तेल-गैस टर्मिनल और उत्पादन केंद्र प्रभावित हुए हैं, जिससे वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ने लगी हैं।

भारत अपनी तेल जरूरत का लगभग 85-90% आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ने का सीधा असर भारत के ईंधन और महंगाई पर पड़ सकता है।

निर्यात और व्यापार पर भी दबाव

मिडिल ईस्ट भारत के लिए एक बड़ा व्यापारिक बाजार है। युद्ध के कारण

  • हवाई मार्ग और शिपिंग रूट प्रभावित हुए
  • कई निर्यात शिपमेंट में देरी हुई
  • जेम्स-ज्वेलरी, स्टील और अन्य उद्योगों को नुकसान की आशंका बढ़ी

कुछ भारतीय कंपनियों ने पहले ही निर्यात में देरी की चेतावनी दी है।

शेयर बाजार और रुपये पर असर

वैश्विक अनिश्चितता के कारण भारतीय शेयर बाजार में भी दबाव देखने को मिला है। तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचती है तो भारत की आर्थिक वृद्धि दर पर भी असर पड़ सकता है।

सरकार की तैयारी

स्थिति को संभालने के लिए केंद्र सरकार ने कुछ आपात कदम उठाए हैं, जिनमें

  • गैस आपूर्ति का पुनर्वितरण
  • घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश
  • विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप

जैसे उपाय शामिल हैं, ताकि ऊर्जा आपूर्ति और बाजार स्थिरता बनाए रखी जा सके।

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