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नई दिल्ली, 12 मार्च 2026:
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी गिरावट देखने को मिली। कारोबारी सत्र के अंत में बीएसई सेंसेक्स लगभग 800 अंकों से अधिक टूटकर 76,000 के आसपास बंद हुआ, जबकि निफ्टी-50 भी 200 से ज्यादा अंक गिरकर करीब 23,639 पर बंद हुआ।
दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव रहा, लेकिन अंतिम घंटों में तेज बिकवाली के कारण बाजार गहरे लाल निशान में बंद हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया।
बाजार गिरने के प्रमुख कारण
1. मिडिल ईस्ट तनाव का असर
अमेरिका, इज़राइल और ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। इससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ और शेयर बाजार में बिकवाली बढ़ गई।
2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
तेल की कीमतें बढ़ने से भारत जैसे आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ता है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ती है।
3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली (FII Selling)
विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार बिकवाली से भी बाजार पर दबाव बढ़ा और प्रमुख सूचकांक नीचे आए।
4. कई सेक्टरों में गिरावट
ऑटो, बैंकिंग और एफएमसीजी शेयरों में गिरावट के कारण बाजार पर अतिरिक्त दबाव पड़ा। कई बड़ी कंपनियों के शेयर 3–4% तक गिर गए।
निवेशकों को भारी नुकसान
बाजार में तेज गिरावट के कारण निवेशकों की संपत्ति में भी बड़ी कमी आई। पिछले कुछ दिनों में बाजार पूंजीकरण में लाखों करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई है और निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल यह गिरावट वैश्विक परिस्थितियों से प्रभावित एक अल्पकालिक बाजार सुधार (Correction) हो सकती है। यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और वैश्विक बाजार स्थिर होते हैं, तो आने वाले दिनों में बाजार में सुधार देखने को मिल सकता है।