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खारिज हुई बिभव कुमार की जमानत याचिका, जानें विभव के वकील ने क्या कहा? 

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Swati Maliwal Assault Case: आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल से कथित मारपीट के आरोप में कोर्ट ने आरोपी बिभव कुमार की जमानत पर फैसला सुना दिया.

  आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल से सीएम आवास में कथित मारपीट के आरोपी विभव कुमार की जमानत पर कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया. कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. तीस हजारी कोर्ट में उन्होंने जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन एडिशनल सेशन जज सुशील अनुज त्यागी ने उन्हें जमानत देने से इंकार कर दिया. बिभव पर बीती 13 मई को सीएम आवास पर हमले का आरोप है. दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था और कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें 24 मई को चार दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था. 

‘जमानत मिली तो मेरी जान को खतरा’

इससे पहले कोर्ट में सुनवाई के दौरान स्वाति मालीवाल ने बिभव कुमार की रिहाई का विरोध किया.उन्होंने कहा कि यदि उन्हें जमानत मिली तो यह उनकी जान के लिए खतरा होगा. स्वाति के वकील ने कोर्ट में कहा कि विभव पर जैसे ही एफआईआर दर्ज की गई, उसके बाद उन्हें लगातार बीजेपी का एजेंट कहा गया. सीएम केजरीवाल मारपीट के आरोपी को अपने साथ मुबंई और लखनऊ लेकर भी गए. स्वाति की ओर से कहा गया कि इनके पास ट्रॉलिंग की एक बड़ी फौज है जो मेरे खिलाफ अभियान चला रही है. 

दिल्ली पुलिस ने क्या दी दलील? 

दिल्ली पुलिस की ओर से भी  विभव कुमार की जमानत का विरोध किया गया. पुलिस ने कहा कि किस तरह महिला को मारा गया कि उसके कपड़ों के बटन तक टूट गए. दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह मौजूदा समय में संसद की सदस्य हैं, दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष रही हैं. दिल्ली पुलिस ने कहा कि पार्टी चीफ ने एक समय इसी महिला को लेडी इमेज कहा था. क्या वे ऐसे व्यक्ति की छवि खराब करने की कोशिश करेंगी. 

विभव के वकील ने क्या कहा? 

बिभव कुमार की ओर से पेश हुए वकील एन हरिहरन ने भी कोर्ट में अपनी दलील दी. उन्होंने कहा कि स्वाति जब सीएम केजरीवाल के आवास पर पहुंची तो उन्होंने ही विभव कुमार को बुलाया. वे इससे पहले वहां नहीं थे. इसके बाद वह केजरीवाल के घर के अंदर जाने लगीं. हरिहरन ने सवाल किया कैसे कोई मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास में घुस सकता है? उन्होंने आगे कहा कि किसी उन्होंने अपनी एफआईआर में जो भी कहा है वह सही नहीं है. वे दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष रही हैं. उन्हें अपना  अधिकार मालूम है, इसके बाद भी उन्होंने तीन दिन बाद एफआईआर दर्ज क्यों कराई? 

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