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लोकसभा चुनाव को लेकर एक बेहद ही रोचक आंकड़ा सामने आया है. जिन लोकसभा सीटों पर गरीबी कम हुई वहां बीजेपी को झटका लगा जबकि उन क्षेत्रों में कांग्रेस की सीटें डबल हो गईं. वहीं दूसरी तरफ जिन सीटों पर गरीबी बढ़ी वहां बीजेपी के खाते में पिछली बार से दो सीटें ज्यादा गईं.
लोकसभा सीटों पर गरीबी कम हुई वहां बीजेपी को झटका, कांग्रेस की सीटें हुए डबल
लोकसभा चुनाव को लेकर एक बेहद ही रोचक आंकड़ा सामने आया है. जिन लोकसभा सीटों पर गरीबी कम हुई वहां बीजेपी को झटका लगा जबकि उन क्षेत्रों में कांग्रेस की सीटें डबल हो गईं. वहीं दूसरी तरफ जिन सीटों पर गरीबी बढ़ी वहां बीजेपी के खाते में पिछली बार से दो सीटें ज्यादा गईं.
Lok Sabha Elections 2024: लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान सत्ताधारी भाजपा ने देश से गरीबी हटाने के मुद्दे को जोर शोर से उठाया था लेकिन मजे की बात ये है कि 2015-16 के दौरान जिन लोकसभा क्षेत्रों में गरीब लोगों की आबादी में कमी आई, वहां बीजेपी की सीटों में कमी आई जबकि कांग्रेस की सीटें दोगुनी हो गईं.
आंकड़ों के अनुसार 2015-16 के बीच 517 लोकसभा क्षेत्रों में गरीबी कम हुई है लेकिन बीजेपी को इन 517 में से 232 सीटें पर जीत मिली जबकि 2019 में बीजेपी ने इनमें से 295 सीटें जीती थीं. वहीं दूसरी तरफ इन क्षेत्रों में कांग्रेस की सीटें 2019 के 42 के मुकाबले 2024 में 92 हो गईं. एनडीए ने ऐसी 282 जबकि इंडिया गठबंधन ने 226 सीटों पर जीत हासिल की.
दो दशक में 25 करोड़ लोग बहुयायामी गरीबी से बाहर आए
लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोर शोर से इस बात का बखान किया था कि पिछले एक दशक में उनके कार्यकाल में 25 करोड़ लोग बहुयायामी गरीबी से बाहर आए हैं. नीति आयोग ने भी अपनी रिपोर्ट में यह बात कही थी. नीति आयोग ने हर पांच साल में होने वाले राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के डेटा का हवाला देते हुए ये बात कही थी लेकिन चुनावों में मोदी सरकार को इसका फायदा नहीं मिला. जहां गरीबी कम हुई उनमें से 63 सीटों पर बीजेपी हार गई. बहुआयामी गरीबी में स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन के स्तर में तीव्र अभाव को मापा जाता है.
इन 517 लोकसभा क्षेत्रों में से 314 लोकसभा क्षेत्रों के लोगों ने इस बार भी समान पार्टी को वोट किया जबकि 203 सीटों के लोगों ने इस बार अन्य पार्टी को वोट किया.
इनमें से जिन 295 सीटों में से बीजेपी ने 2019 में जीत हासिल की थी, इस बार वह 295 में से 201 सीटें जीतने में कामयाब रही. जिन सीटों पर बीजेपी हारी उनमें से सबसे ज्यादा 42 सीटें कांग्रेस ने जीतीं, इसके बाद समाजवादी पार्टी ने 24, टीएमसी ने 8, एनसीपी (एसपी) ने 6, आरजेडी और लेफ्ट ने 1-1 सीट जीतीं.
जहां बढ़ी गरीबी वहां बीजेपी को मिली बढ़त
वहीं दूसरी तरफ जिन 26 सीटों पर 2015-16 और 2019-21 के बीच गरीबी बढ़ी, उनमें से केवल 6 सीटों पर लोगों ने इस बार अन्य पार्टी को वोट दिया बाकी सीटों पर वही पार्टी जीती जिसने 2019 में जीत हासिल की थी.
हालांकि इन सीटों में से केवल 7 सीटें ऐसी थीं जहां गरीबी 1 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी. शिलांग में गरीबी 6.01 प्रतिशत, बिहार के पटना साहिब में गरीबी 4.52 प्रतिशत बढ़ी.
इन 26 सीटों में से बीजेपी के खाते में 9 (पिछली बार से दो ज्यादा), कांग्रेस के खाते में 7, टीएमसी के खाते में 3 सीटें गईं. इन 26 सीटों में से एनडीए ने कुल 11 और इंडिया ब्लॉक ने 14 सीटें जीतीं.
इनमें से केवल 6 सीटें ऐसी थीं जहां की आधी से अधिक आबादी बहुआयामी गरीबी का सामना कर रही है, इनमें तीन बिहार, दो उत्तर प्रदेश और एक झारखंड की सीट शामिल है. इनमें से 5 सीटों पर लोगों ने उसी पार्टी को सुना जिसे उन्होंने 2019 में चुना था, केवल यूपी की श्रावस्ती सीट बीएसपी से झिटककर सपा के पास चली गई
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