22 जनवरी 2026 – डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित ग्लोबल शांति पहल “Board of Peace” में चीन ने शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। यह पहल मुख्य रूप से गाजा संघर्ष को समाप्त करने और वहां शांति बहाल करने के उद्देश्य से बनाई गई है, लेकिन चीन ने इसे स्वीकार नहीं किया।
चीन ने अमेरिका के आमंत्रण को स्वीकार करने के बावजूद जवाब में कहा कि वह किसी भी नए वैश्विक मंच में शामिल नहीं होगा जो संयुक्त राष्ट्र (UN) के ढांचे के बाहर काम करता हो। बीजिंग का मानना है कि वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए यूएन-केंद्रित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन आवश्यक है, और यही चीन की प्राथमिक कूटनीतिक नीति है।
चीन की प्रतिक्रिया के बारे में विदेश मंत्रालय या दूतावास की ओर से कहा गया कि “चाहे अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में कोई भी बदलाव आए, चीन संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखकर बनाई गई वैश्विक व्यवस्था की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।”
बोर्ड ऑफ पीस क्या है?
Board of Peace एक वैश्विक शांति मंच है जिसे ट्रंप ने दावोस, स्विट्जरलैंड में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दौरान पेश किया। इसका लक्ष्य गाजा में संघर्ष विराम लागू करना और वहां दीर्घकालिक स्थिरता लाना बताया गया है। ट्रंप इसे ‘अब तक का सबसे प्रतिष्ठित शांति मंच’ कह रहे हैं और दुनिया भर के लगभग 50 से अधिक देशों को न्योता भेजा है।
अमेरिका का दावा है कि इस बोर्ड के पास संघर्ष समाधान, निवेश, पुनर्निर्माण और क्षेत्रीय शांति के लिए महत्वपूर्ण भूमिका होगी। साथ ही, स्थायी सदस्यता के लिए सौ करोड़ डॉलर (लगभग 1 अरब डॉलर) का योगदान देने वाले देशों को स्थायी बैठे की पेशकश बताई जा रही है।
दुनियाभर की प्रतिक्रिया और भू-राजनीतिक प्रतिक्रिया
- चीन के अलावा फ्रांस, यूके, नॉर्वे और स्वीडन जैसे देश भी इस पहल में शामिल नहीं होना चाहते हैं। अधिकांश का यह कहना है कि यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के ढांचे के बाहर है और इसलिए वह इसमें भाग नहीं लेंगे।
- कुछ देशों ने न्योता स्वीकार कर लिया है — जिनमें पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुछ मध्य पूर्वी राष्ट्र शामिल हैं।
- रूस ने इस बारे में कहा है कि वह इसे अध्ययन कर रहा है और किसी स्पष्ट निर्णय पर पहुंचने से पहले रणनीतिक साझेदारों से परामर्श करेगा।
विश्लेषण: क्यों कर रहा है चीन इनकार?
विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन इस कदम से यह स्पष्ट संदेश देना चाहता है कि वह:
संयुक्त राष्ट्र आधारित बहुपक्षवाद को प्राथमिकता देता है
अमेरिका-नियंत्रित मंचों के बजाय मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को मजबूत करना चाहता है
किसी एक-तरफा वैश्विक मंडल में शामिल नहीं होना चाहता, जो विश्व शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है
क्या इससे ट्रंप की पहल कमजोर होगी?
चीन के इनकार से Board of Peace की वैश्विक विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। यूएन-सीधे लागू समाधान को प्राथमिकता देने वाले देशों के रुख से यह स्पष्ट हुआ है कि यह कार्यक्रम किसी व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन की कमी का सामना कर रहा है।