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दिल्ली

तालिबान के विदेश मंत्री के प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को बाहर रखने पर विवाद

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Politics News: अफगानिस्तान के तालिबान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी की 9-16 अक्टूबर 2025 की भारत यात्रा के दौरान दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को शामिल न करने पर सियासी बवाल मच गया है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा, “प्रधानमंत्री जी, कृपया बताएं कि तालिबान प्रतिनिधि के प्रेस कॉन्फ्रेंस से महिला पत्रकारों को हटाने के मामले में आपकी क्या स्थिति है। अगर महिलाओं के अधिकारों की बात आपके लिए चुनावी नाटक नहीं है, तो भारत की सबसे सक्षम महिलाओं का यह अपमान कैसे बर्दाश्त किया गया, जो हमारे देश की रीढ़ और गर्व हैं?”

घटना का विवरण

यह प्रेस कॉन्फ्रेंस अफगान दूतावास में आयोजित की गई थी, जहां तालिबान अधिकारियों ने मेहमानों की सूची तय की। इस दौरान प्रमुख भारतीय समाचार चैनलों की महिला पत्रकारों को प्रवेश से वंचित कर दिया गया। भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि दूतावास क्षेत्र विदेशी क्षेत्र माना जाता है और वहां की गतिविधियों में भारत सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है, क्योंकि यह कूटनीतिक असंप्रभावना के तहत आता है। तालिबान ने इस घटना को अनजाने में हुई गलती बताया, लेकिन उनकी अफगानिस्तान में महिलाओं पर सख्त पाबंदियों की नीति चर्चा में है।

प्रतिक्रियाएं

प्रियंका गांधी के ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कुछ यूजर्स ने इसे भारत की विदेश नीति और तालिबान के साथ बढ़ते संबंधों से जोड़ा, जबकि अन्य ने तर्क दिया कि दूतावास में हुई घटना के लिए भारत सरकार जिम्मेदार नहीं है। राहुल गांधी ने भी पीएम पर निशाना साधते हुए कहा, “जब आप महिलाओं को सार्वजनिक मंच से बाहर करते हैं, तो यह भारत की हर महिला को बताता है कि आप उनके लिए खड़े होने में बहुत कमजोर हैं।”दूसरी ओर, कुछ यूजर्स ने प्रियंका से सवाल किया कि क्या वे भारत में धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश पर भी आवाज उठाएंगी, जहां भी कई बार लैंगिक भेदभाव देखने को मिलता है।

अमीर खान मुत्तकी की यह यात्रा तालिबान के सत्ता में आने (2021) के बाद भारत की सबसे उच्चस्तरीय मुलाकात है। भारत ने तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन व्यावहारिक संबंधों को बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं, जिसमें काबुल में दूतावास फिर से खोलने की घोषणा भी शामिल है। इस यात्रा को क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और पाकिस्तान के साथ तालिबान के खराब रिश्तों के संदर्भ में देखा जा रहा है।

यह घटना भारत की महिलाओं के अधिकारों और कूटनीतिक मर्यादाओं के बीच एक जटिल बहस को जन्म दे रही है। आगे की प्रतिक्रिया और सरकार का जवाब इस मुद्दे को और स्पष्ट करेगा।

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