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अवैध निर्माण और पार्किंग पर कार्रवाई में ढिलाई, क्या रोहित शिंदे और मकाने को पद से हटाया जाएगा?

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Malvani News: महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (म्हाडा) के मालवणी क्षेत्र में सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण और पार्किंग का मामला तूल पकड़ रहा है। सामना नगर, मालवणी गेट नंबर 8 के पास फेडरेशन और सोसायटियों द्वारा सरकारी जगह पर कब्जा कर अवैध पार्किंग और निर्माण का सिलसिला जारी है, लेकिन म्हाडा के अधिकारी रोहित शिंदे और मकाने पर कार्रवाई न करने के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय निवासियों और मीडिया के अनुसार, ये अधिकारी केवल दिखावे के लिए नोटिस जारी करते हैं, जबकि वास्तविक कार्रवाई नदारद है। क्या ये अधिकारी अवैध कार्यों को संरक्षण दे रहे हैं? सवाल उठ रहा है कि क्या इन्हें तत्काल पद से हटा देना चाहिए?

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अवैध निर्माण पर ढीली कार्रवाई: सिर्फ एक ध्वस्त, बाकी बचे

सामना नगर इलाके में कई अवैध निर्माणों की शिकायतें मिलने के बावजूद, म्हाडा ने केवल एक ही संरचना को ध्वस्त किया है। बाकी निर्माण जैसे ही बने हुए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव द्वारा अवैध पार्किंग का धंधा फल-फूल रहा है, लेकिन अधिकारी रोहित शिंदे और मकाने कोई सख्त कदम नहीं उठा रहे। एक निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “ये अधिकारी मीडिया के सामने वादे करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं होता। अवैध पार्किंग फिर से शुरू हो चुकी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर खामोशी।”

  • यह म्हाडा द्वारा अवैध निर्माण के खिलाफ नोटिस जारी किया था, जिसमें आप देख सकते हैं कि म्हाडा द्वारा कई सारे अवैध निर्माण का ब्ल्यू प्रिंट बनाया है, पर ध्वस्त सिर्फ एक किया है, और इसका पूरा श्रेह म्हाडा के अधिकारी मकाने और रोहित शिंदे को जाता है।

मीडिया से बातचीत में मकाने ने दावा किया कि प्रति दिन एफआईआर दर्ज की जा रही है, लेकिन कोई एफआईआर ही दर्ज नहीं हुई। यह सिलसिला पिछले 20 दिनों से चल रहा है। जब पत्रकार फेडरेशन के अध्यक्ष-सचिव के खिलाफ एफआईआर न दर्ज करने पर सवाल उठाते हैं, तो मकाने का जवाब होता है, “जल्द ही मालवणी पुलिस को पत्र जारी करेंगे।” लेकिन पत्र जारी नहीं होता। एक बार तो मकाने ने एफआईआर से इनकार कर दिया और कहा कि वरिष्ठ अधिकारी संदीप कलांबे ने मना किया है। लेकिन कलांबे से संपर्क करने पर उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। अब सवाल यह है कि आखिर ये अधिकारी फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव को क्यों बचा रहे हैं? क्या उन्हें कोई व्यक्तिगत लाभ मिल रहा है?

सोसायटियों में बढ़ा मनोबल: नया अवैध गार्डन निर्माण

एफआईआर न दर्ज होने से अन्य फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव का मनोबल बढ़ा है, और अब सोसायटी स्तर पर भी अवैध कार्य शुरू हो गए हैं। मालवणी ओम सिद्धिविनायक सोसायटी के अध्यक्ष और सचिव ने म्हाडा की खाली सरकारी जमीन पर अवैध गार्डन का निर्माण शुरू कर दिया है। सोसायटी के अध्यक्ष और सचिव को पता है कि म्हाडा के ब्ल्यू प्रिंट में दो गार्डन निर्माण किया है फिर भी जिद्द में अवैध गार्डन का निर्माण किया जा रहा है, और इसकी पूरी जानकारी म्हाडा के अधिकारी मकाने को है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। एक सोसायटी सदस्य ने कहा, “अधिकारी जानते हैं, लेकिन अनदेखी कर रहे हैं। अगर सिस्टम सुधरेगा तो ये अवैध कार्य रुकेंगे।”

इस जगह पर मालवणी ओम सिद्धिविनायक सोसाइटी के अध्यक्ष और सचिव अवैध गार्डन का निर्माण करने को उतारू हो चुके है, म्हाडा ने पहले ही सभी सोसायटी को २ बड़े गार्डन का निर्माण करके दे चुकी है फिर यह अवैध गार्डन का जिद्द किस लिए..?

रोहित शिंदे के साथ फेडरेशन और सोसायटी प्रतिनिधियों की बैठकों में भी यही आश्वासन मिलता है: “हम कार्रवाई नहीं करना चाहते, मीडिया के दबाव में करना पड़ता है।” इससे अधिकारियों की निष्ठा और ईमानदारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। निवासी पूछ रहे हैं, “अगर सिस्टम ही भ्रष्ट है, तो अवैध कार्य कैसे रुकेंगे? प्रमाण मिलने पर भी एक्शन न लेने वाले अधिकारियों को तुरंत हटा देना चाहिए।”

बड़ा हादसा होने का डर: क्या तब जागेंगे अधिकारी?

अवैध पार्किंग फिर से शुरू हो चुकी है, और मकाने को इसकी सूचना मिल चुकी है। लेकिन कार्रवाई शून्य। स्थानीय लोग चिंतित हैं कि क्या कोई बड़ा हादसा होने पर ही ये अधिकारी जागेंगे? मालवणी इलाका पहले से ही अवैध पार्किंग माफिया के लिए कुख्यात है, जहां पहले भी हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं। एक निवासी ने कहा, “अगर पार्किंग विवाद में कोई मौत हुई, तो जिम्मेदारी किसकी? म्हाडा के इन अधिकारियों की?”

क्या रोहित शिंदे और मकाने को पद से हटाया जाए?

निवासियों का मांग है कि रोहित शिंदे और मकाने जैसे अधिकारियों को तत्काल पद से हटा दिया जाए। वे कहते हैं, “जब तक ऐसे अधिकारी बने रहेंगे, तब तक सरकारी जमीन पर कब्जा और अवैध निर्माण जारी रहेगा। सिस्टम को सख्ती दिखानी होगी।” म्हाडा मुख्यालय से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

यह मामला म्हाडा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रहा है। स्थानीय विधायक और म्हाडा आला अधिकारियों को इसकी जांच करनी चाहिए। क्या आपका इलाका भी अवैध निर्माण का शिकार है? अपनी राय साझा करें।

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