Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
मुंबई, 24 जुलाई 2025: मालवणी के सामना नगर, गेट नंबर 8 में MHADA की खुली जमीन पर अवैध निर्माण और पार्किंग का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय जनता ने बार-बार MHADA अधिकारियों से फेडरेशन के बोर्ड और अवैध गतिविधियों को हटाने की मांग की, लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। स्वप्नपूर्ति सोसायटी और फेडरेशन के अध्यक्ष बालासाहेब भगत पर गंभीर आरोप लग रहे हैं, जिन्होंने MHADA की जमीन पर वॉचमैन केबिन बनवाया और अवैध पार्किंग शुरू की। इस पार्किंग से सड़क पूरी तरह अवरुद्ध हो गई है, जिससे लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
अवैध गतिविधियों का खुलासा: आरोप है कि भगत और उनके सहयोगियों ने सात साल तक वाहन मालिकों से पार्किंग शुल्क वसूला किया, लेकिन MHADA ने अब तक इस पर FIR तक दर्ज नहीं की। वशिष्ठ वाणी न्यूज और संसद वाणी न्यूज ने MHADA अधिकारियों से सवाल किया कि भगत, जो एक ऑटो रिक्शा चालक हैं, म्हाडा के लॉटरी में उन्हें एक फ्लैट दिया गया जिसका कीमत ५ लाख था, पर अब उनके पास 20-25 लाख की कीमत के दो फ्लैट कैसे आए? क्या सोसायटी और फेडरेशन के फंड का दुरुपयोग हुआ? इसके अलावा, फेडरेशन के नाम पर ‘सामना मित्र मंडल’ बनाकर राशि को सूद पर बांटने के भी दावे सामने आए हैं। भगत पर फेडरेशन के पर्ची बनाकर धार्मिक के नाम पर चंदा वसूलने का भी आरोप है, लेकिन MHADA की ओर से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं किया गया।
MHADA बायलॉज का उल्लंघन?: इस मामले में कई सवाल उठ रहे हैं:
- क्या MHADA की जमीन पर फेडरेशन बनाकर अवैध पार्किंग की जा सकती है?
- क्या मेन गेट पर फेडरेशन का बोर्ड लगाना वैध है, खासकर जब यह पहले गिरकर एक बच्ची को चोटिल कर चुका हो?
- क्या दोनों तरफ पार्किंग कर सड़क बंद करना और लोगों की जान जोखिम में डालना MHADA नियमों में शामिल है?
- क्या फेडरेशन बनाकर वाहन मालिकों से धोखे से शुल्क वसूलना जायज है, और यदि नहीं, तो MHADA की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
हादसे का खतरा: फेडरेशन का बोर्ड पहले गिर चुका है, जिसमें एक बच्ची घायल हुई थी। फिर भी भगत ने इसे दुबारा लगवाया। क्या यह MHADA बायलॉज का उल्लंघन नहीं? स्थानीय निवासियों का कहना है, “हमारी जान से खिलवाड़ हो रहा है, लेकिन अधिकारी मौन हैं।”
वशिष्ठ वाणी और संसद वाणी ने MHADA अधिकारियों निलेश मडामे और रोहित शिंदे को एक नक्शा सौंपा, जिसमें मेन गेट पर बोर्ड या केबिन के लिए कोई जगह नहीं दिखाई गई। निलेश मडामे ने MRTP एक्ट के तहत कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया।
जनता का गुस्सा: स्थानीय निवासियों का कहना है, “हमारे सवालों को अनदेखा करना MHADA की नाकामी है। भगत जैसे लोग हमारी सुरक्षा और अधिकारों से खिलवाड़ कर रहे हैं।” सामाजिक कार्यकर्ता और मीडिया इस मुद्दे को उठाते रहे, लेकिन प्रशासन की चुप्पी सवालों को और गहरा रही है।
क्या MHADA इस अवैधता पर सख्ती दिखाएगी, या यह मामला भी लंबित रह जाएगा? जनता जवाब मांग रही है, और संसद वाणी इस मुद्दे पर नजर बनाए रखेगा। यदि आपके पास इस मामले से जुड़ी जानकारी है, तो हमें बताएं। आप देख रहे हैं संसद वाणी, जहां सच की आवाज़ गूंजती है।
You must be logged in to post a comment Login