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मुंबई, 23 जुलाई 2025: मालवणी के सामना नगर में आज MHADA (महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी) ने अवैध निर्माण के खिलाफ बुलडोजर चलाकर कुछ संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई स्वप्नपूर्ति सोसाइटी और फेडरेशन के अध्यक्ष बालासाहेब भगत द्वारा कथित तौर पर किए गए अवैध निर्माणों के खिलाफ थी। हालांकि, इस कार्रवाई ने कई सवाल खड़े किए हैं, क्योंकि सभी अवैध निर्माणों को नहीं तोड़ा गया और MHADA अधिकारियों पर पक्षपात के आरोप लग रहे हैं।
वशिष्ठ वाणी न्यूज ने इस मामले को उजागर करते हुए MHADA के गोरेगांव क्षेत्र के अधिकारी रोहित शिंदे को अवैध निर्माण की जानकारी दी थी। इसके बाद, MHADA ने 23 अप्रैल 2025 को स्वप्नपूर्ति सोसाइटी और फेडरेशन को नोटिस जारी किया था। लेकिन बालासाहेब भगत ने इस नोटिस को कथित तौर पर अनदेखा कर दिया और कोई भी अवैध निर्माण नहीं हटाया। आज, 23 जुलाई को MHADA की टीम ने सामना नगर, मालवणी गेट नंबर पर पहुंचकर कुछ अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया। हैरानी की बात यह है कि बालासाहेब भगत ने केवल एक सीमेंट की छत को हटाने की अनुमति मांगी, जिसे MHADA ने स्वीकार कर लिया।
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने MHADA के इस रवैये पर सवाल उठाए हैं। सवाल यह है कि आखिर क्यों सभी अवैध निर्माणों को नहीं हटाया गया? MHADA अधिकारियों का बालासाहेब भगत के प्रति नरम रवैया संदेह के घेरे में है। लोगों का कहना है कि MHADA ने पहले भी कई बार नोटिस जारी किए, लेकिन कार्रवाई आधी-अधूरी ही रही। यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या MHADA और बालासाहेब भगत के बीच कोई साठ-गांठ है, जिसके चलते बार-बार उन्हें राहत दी जा रही है?
- क्या सोसायटी और फेडरेशन के अध्यक्ष बालासाहेब भगत पर होगा कानूनी कार्रवाई?
अवैध निर्माण के मामले में MHADA ने अब तक कोई स्पष्ट कानूनी कार्रवाई का उल्लेख नहीं किया है। सामान्य तौर पर, अवैध निर्माण के लिए महाराष्ट्र क्षेत्रीय और नगर नियोजन अधिनियम (MRTP Act) की धारा 52 और 53 के तहत कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें जुर्माना, निर्माण ध्वस्त करने का आदेश, और गंभीर मामलों में आपराधिक मुकदमा दर्ज हो सकता है। इसके अलावा, BMC (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) और MHADA के नियमों के तहत अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ FIR दर्ज की जा सकती है।
हालांकि, बालासाहेब भगत के खिलाफ अब तक कोई FIR दर्ज होने की जानकारी सामने नहीं आई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर बार की तरह इस बार भी भगत को बख्शा जा सकता है। MHADA के अधिकारी रोहित शिंदे ने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया है, जिससे संदेह और गहरा रहा है।
सामना नगर के निवासियों ने इस कार्रवाई को ‘दिखावा’ करार दिया है। उनका कहना है कि अवैध निर्माणों ने क्षेत्र में जल निकासी, पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं को प्रभावित किया है। एक निवासी ने कहा, “MHADA ने सिर्फ एक छत हटाई, बाकी बड़े-बड़े अवैध निर्माण अब भी खड़े हैं। यह कार्रवाई सिर्फ खानापूर्ति है।”
यह देखना बाकी है कि MHADA इस मामले में और क्या कदम उठाएगी। क्या बालासाहेब भगत के खिलाफ कोई सख्त कानूनी कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी पहले की तरह दब जाएगा? सामाजिक कार्यकर्ता और वशिष्ठ वाणी न्यूज ने इस मुद्दे को और जोर-शोर से उठाने का फैसला किया है। लोगों की मांग है कि सभी अवैध निर्माणों को पूरी तरह ध्वस्त किया जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो।
MHADA से अपेक्षा की जा रही है कि वह इस मामले में पारदर्शिता बरते और सभी अवैध निर्माणों पर समान रूप से कार्रवाई करे। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन की जवाबदेही और निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं।
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