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रेड लाइट में गुजरा बचपन, आखिर क्यों तवायफों पर बनाते हैं फिल्म? भंसाली ने खुद ही बताई वजह 

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वैश्याओं की जिंदगी पर बनी संजय लीला भंसाली की हालिया रिलीज फिल्म हीरामंडी लोगों को खूब पसंद आ रही है. इससे पहले भंसाली तवायफों के जीवन पर देवदास, गंगूबाई काठियाबाड़ी जैसी फिल्में बना चुके हैं.

1 मई को रिलीज हुई संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘हीरामंडी’ इस वक्त चर्चाओं में है. यह फिल्म आजादी से पहले लाहौर के हीरामंडी इलाके की वेश्याओं की कहानी है. इससे पहले भंसाली वेश्याओं की जिंदगी पर देवदास, गंगूबाई काठियावाड़ी जैसी सुपरहिट फिल्म बना चुके हैं. आखिर भंसाली को वैश्याओं की जिंदगी के इर्द-गिर्द घूमती कहानियां हीं क्यों पसंद आती है. वे वेश्याओं के ऊपर फिल्में बनाना क्यों पसंद करते हैं? भंसाली ने एक इंटरव्यू के दौरान इस सवाल का जवाब दिया था.

आखिर तवायफों पर फिल्म क्यों बनाते हैं भंसाली

इंटरव्यू के दौरान इस सवाल का जवाब देते हुए भंसाली ने कहा था, ‘मैं मुंबई के रेड-लाइट एरिया कमाठीपुरा में पला-बड़ा . बचपन में जो भी आप देखते हो उसको लेकर सेंसिटिव हो जाते हो. एक इंसान की कीमत 20 रुपए कैसे हो सकती है? ये वो चीजें थीं जो मेरे दिमाग में रह गईं, लेकिन में उन सभी बातों को नहीं पता सकता. मैं चंद्रमुखी, गंगूबाई…के जरिए उन्हेंं तलाशता हूं. हम अनमोल हैं, हमारी कीमत नहीं लगाई जा सकती. हम 5, 20 या 50 रुपए में नहीं बेचे जा सकते. यह अमानवीय है.’

वो बहुत सारा पेंट और पाउडर लगाती हैं, उनका दुख देखिए

रेड लाइट एरिया की महिलाओं के बारे में बताते हुए डायरेक्टर भंसाली ने कहा था कि वे खुद को खूबसूरत दिखाने के लिए बहुत सारा पेंट और पाउडर लगाती हैं. उनका दुख तो देखिए. आप इस दुख को कैसे छुपा सकते हैं? आप नहीं छुपा सकते. सबसे बड़ा मेकअप आर्टिस्ट भी ऐसा नहीं कर सकता. यही वो पल होते हैं और फिल्म मेकर के तौर पर मेरे लिये वही मायने रखते हैं.

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