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मुंबई / मालाड वेस्ट: देश की सबसे अमीर महानगरपालिका (BMC) के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों का ढोल अब पूरी तरह फट चुका है। ग्राउंड जीरो पर जो खेल चल रहा है, उसे देखकर साफ है कि मुंबई में अब कानून का नहीं, बल्कि ‘खाकी, खादी और भू-माफिया’ के गठजोड़ का राज चल रहा है। मामला मालाड वेस्ट के भद्रन नगर (रोड नंबर 1) स्थित ‘कोयला वाला गली’ का है, जहाँ रेलवे ट्रैक के बिल्कुल करीब, जनसुरक्षा और नियमों की धज्जियां उड़ाकर एक विशाल जानलेवा अवैध निर्माण खड़ा किया जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि ‘संसद वाणी’ पिछले 53 दिनों से लगातार इस महा-भ्रष्टाचार के खिलाफ पुख्ता सबूतों के साथ आवाज उठा रहा है, लेकिन पूरा प्रशासनिक अमला आंखें मूंदकर बहरा बना बैठा है।
📉 पी/उत्तर (P/North) वार्ड: जब रक्षक ही बन जाएं ‘महा-भ्रष्टाचार’ के भक्षक!
इस पूरे मामले का सबसे शर्मनाक और हास्यास्पद पहलू यह है कि पी/उत्तर वार्ड के सहायक आयुक्त कुंदन वळवी के कार्यालय से 21 मई 2025 को ही इस अवैध निर्माण के खिलाफ आधिकारिक तौर पर ‘तोड़ू कार्रवाई’ का नोटिस जारी किया गया था।
सिस्टम का सबसे बड़ा सच: > नोटिस जारी हुए महीनों बीत गए, लेकिन मजाल है कि उस अवैध ढांचे की एक ईंट भी हिली हो! शायद कुंदन वळवी जी रामायण के ‘कुंभकर्ण’ से ट्यूशन ले रहे हैं, जो लगातार मीडिया रिपोर्टिंग और खुद के दफ्तर के नोटिस के बाद भी जागने का नाम नहीं ले रहे। या फिर यह कड़वा सच मान लिया जाए कि BMC का यह नोटिस सिर्फ कागजी खानापूर्ति और ‘टेबल के नीचे की सेटिंग’ शुरू करने का एक जरिया मात्र था?
❓ कमिश्नर अश्विनी भिड़े जी, आपके ‘हंटर’ में जंग लग गया या फाइलें ‘भारी’ हो गईं?
मुंबई की कमान संभाल रहीं बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिड़े के प्रशासनिक अनुशासन और कड़क रवैये के चर्चे तो बहुत सुने जाते हैं, लेकिन मालाड का यह खुला भ्रष्टाचार उनके दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
मालाड की पीड़ित जनता अब सीधे मैडम कमिश्नर से पूछ रही है:
फाइलों में ‘वजन’: क्या वरिष्ठ अधिकारियों तक इस भ्रष्टाचार की फाइलें पहुँचने से पहले ही फाइलों में ‘वजन’ रख दिया जाता है?
अदृश्य दबाव: आखिर वो कौन सी राजनीतिक या आर्थिक ताकत है जिसके आगे कमिश्नर कार्यालय ने भी मालाड की जनता को भू-माफियाओं के रहमों-करम पर छोड़ दिया है?