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ओशिवारा: मालाड-ओशिवारा का व्यस्त सिग्नल क्षेत्र, जो सुगम यातायात के लिए बनाया गया था, आज ‘अवैध पार्किंग जोन’ में तब्दील हो चुका है। संसद वाणी की टीम द्वारा किए गए ग्राउंड सर्वे में सामने आया है कि सड़क के दोनों किनारों पर अनधिकृत वाहनों का तांता लगा है, जिससे न केवल ट्रैफिक जाम की समस्या गंभीर हो गई है, बल्कि राहगीरों के लिए सड़क पार करना भी जोखिम भरा हो गया है।
संसद वाणी का तीखा सवाल
हमारा सीधा और कड़ा सवाल प्रशासन से है:
“आखिर सड़क पर इस तरह अवैध पार्किंग की अनुमति कौन दे रहा है? क्या शहर की मुख्य सड़कों का उपयोग अब निजी वाहनों को खड़ा करने के लिए किया जाने लगा है?” ऐसा लगता है कि नियम-कानून सिर्फ कागजों पर सिमट कर रह गए हैं और सड़कों पर कानून का कोई डर नहीं बचा है।
RTO और ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न
यह इलाका शहर के सबसे व्यस्त सिग्नलों में से एक है, जहाँ से रोज़ाना हज़ारों वाहन गुजरते हैं। ऐसे में RTO और स्थानीय ट्रैफिक अधिकारियों की नज़र इन अवैध रूप से खड़े वाहनों पर क्यों नहीं पड़ती?
- क्या संबंधित विभाग को ये वाहन दिखाई नहीं दे रहे?
- यदि ये अवैध हैं, तो अभी तक इन्हें हटाने या जुर्माना लगाने की कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
- क्या अधिकारी और इन पार्किंग माफियाओं के बीच किसी तरह की मिलीभगत है, जो इस अव्यवस्था को बढ़ावा दे रही है?
कार्रवाई की मांग
संसद वाणी इस मामले को गंभीरता से उठा रही है। हम मांग करते हैं कि ओशिवारा सिग्नल के पास तत्काल प्रभाव से एंटी-पार्किंग अभियान चलाया जाए और बिना किसी ढिलाई के इन वाहनों को ज़ब्त किया जाए।
सड़कें यातायात के लिए हैं, किसी की निजी पार्किंग के लिए नहीं। क्या प्रशासन इस जनसमस्या पर संज्ञान लेगा या ‘चलता है’ की नीति अपनाकर बड़ी दुर्घटना को न्योता देता रहेगा?