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मुम्बई

क्या कुर्सी मिलते ही बदल जाती है लोक सेवकों की प्राथमिकताएं? प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल

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मुंबई: एक आईएएस अधिकारी का सपना अक्सर समाज सेवा और आम आदमी की समस्याओं को हल करने से जुड़ा होता है। लेकिन क्या सत्ता के गलियारों में पहुँचते ही यह सेवाभाव गायब हो जाता है? यह सवाल आज मुंबई की जनता के मन में उठ रहा है, और केंद्र में हैं बीएमसी की वर्तमान आयुक्त अश्विनी भिड़े (Ashwini Bhide)

अधिकार बनाम जवाबदेही

आम धारणा है कि सेवा में आने वाला हर अधिकारी जनहित के लिए प्रतिबद्ध होता है। मगर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। वर्तमान में बीएमसी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अक्सर यह देखा गया है कि जनता की समस्याओं को अनसुना करने वाले अधिकारी भी, नेताओं के एक इशारे पर तुरंत सक्रिय हो जाते हैं। सवाल यह है कि क्या आयुक्त अश्विनी भिड़े के नेतृत्व में बीएमसी का प्रशासन जनता की आवाज़ सुनने के बजाय केवल राजनीतिक निर्देशों और प्रमोशन की चिंता में डूबा है?

फुटपाथ से सड़क तक कब्ज़ा, प्रशासन मौन

‘वाशिष्ठ मीडिया हाउस’ के संस्थापक अभिषेक अनिल वाशिष्ठ ने पिछले कई दिनों से धर्म के नाम पर हो रहे अवैध कब्जों का मुद्दा उठाया है। स्थिति यह है कि फुटपाथों पर कब्जे के बाद अब अवैध अतिक्रमण सड़कों तक पहुंच चुका है, जिससे पैदल चलने वालों के लिए सड़क के बीच से गुजरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

कानून का डर या नेताओं का दबाव?

अभिषेक अनिल वाशिष्ठ ने आयुक्त अश्विनी भिड़े को इस संदर्भ में लीगल नोटिस भेजकर जवाब मांगा था। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि इन अधिकारियों को कानून से अधिक अपने आकाओं का डर है। जनता अब यह पूछने पर मजबूर है:

  • यदि एक आईएएस अधिकारी का काम जनता के प्रति जवाबदेह होना है, तो मीडिया और नागरिकों के वैध सवालों पर चुप्पी क्यों साधी जा रही है?
  • क्या आयुक्त कार्यालय केवल मंत्री या राजनेताओं के दबाव में ही कार्रवाई करने के लिए बना है?

यह आरोप नहीं, कार्यशैली पर सवाल है

यह कोई व्यक्तिगत आरोप नहीं, बल्कि प्रशासन की उस कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न है, जो जनता की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज करती है। जनता जानना चाहती है कि जिस सर्वोच्च पद पर आयुक्त अश्विनी भिड़े विराजमान हैं, वहां जनता के प्रति जवाबदेही का क्या स्थान है?

मुंबई की जनता को अब आश्वासनों की नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई और स्पष्ट जवाब की अपेक्षा है।

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