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अहमदाबाद के स्कूलों में अब गीता पाठ को अनिवार्य कर दिया गया है. यहां 3000 से ज्यादा शिक्षकों को एक सप्ताह की ट्रेनिंग दी जाएगी. सुबह की प्रार्थना में गीता पाठ अनिवार्य होगा. गुजरात के शिक्षा मंत्री प्रफुल पनसेरिया ने मंगलवार को एक प्रोजेक्ट लॉन्च किया, जिसका नाम विद्यार्थी जीवन पथ प्रदर्शक श्रीमद भगवत गीता है. 13 जून से नया शैक्षणिक सत्र गुजरात में शुरू हुआ है, अब छात्र गीता पाठ से जीवन दर्शन सीखेंगे.
गुजरात विधानसभा में गीता को सरकारी स्कूलों में पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया गया था. अब इस प्रस्ताव के अमल होने की बारी आ गई है. अहमदाबाद के 600 स्कूल अब गीता पाठ कराने के लिए तैयार हो गए हैं. गीता, हिंदू धर्म ग्रंथ महाभारत के एक पर्व का हिस्सा है, जिसमें भगवान कृष्ण अर्जुन को कर्तव्य पर उपदेश देते हैं. गीता के श्लोक, अब स्कूलों में प्रार्थना का अनिवार्य हिस्सा होंगे.
गुजरात के शिक्षा मंत्री प्रफुल पनसेरिया ने मंगलवार को अहमदाबाद में एक कार्यक्रम में ‘विद्यार्थी जीवन पथदर्शक बंशे श्रीमद्भगवद्गीता’ नाम के एक प्रोजेक्ट को लॉन्च किया था. इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 7 फरवरी को बजट सत्र के दौरान विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद ही हो गई थी. जून सत्र से कक्षा VI से XII तक के सरकारी स्कूलों में भगवद गीता को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने का प्रस्ताव रखा गया था. यह प्रस्ताव बिना किसी विरोध के पारित हो गया था. गुजरात के स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र 13 जून से शुरू हुआ है.
कैसे होगा स्कूलों में गीता पाठ?
गुजरात शिक्षा विभाग ने गीता पाठ को लेकर पहले ही तैयारियां की हैं. अहमदाबाद जिला शिक्षा कार्यालय ने ऑडियोविजुअल पाठ तैयार किए हैं. इन्हें शहर के 650 मिडिल और हाई स्कूलों में पढ़ाया जाएगा. अहमदाबाद के 600 से अधिक स्कूलों में सुबह की सभा में ये वीडियो अनिवार्य रूप से शामिल होंगे.
हर सप्ताह एक श्लोक का पाठ होगा, जिसकी विडियो रिकॉर्डिंग भी होगी. इसके बारे में सरकार सभी स्कूलों को सर्कुलर जारी करने वाली है. यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राज्य सरकार की पहल के तहत उठाया गया है.
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