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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शनिवार को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की तीन व्यापक योजनाओं को जारी रखने की मंजूरी दे दी जिनका ‘विज्ञान धारा’ नामक एकीकृत केंद्रीय क्षेत्र योजना में विलय कर दिया गया है। सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि 15वें वित्त आयोग की 2021-22 से 2025-26 की अवधि के दौरान विज्ञान धारा के लिए प्रस्तावित परिव्यय 10,579 करोड़ रुपये है। इस योजना के तीन व्यापक घटक हैं जिनमें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थागत और मानव क्षमता निर्माण; अनुसंधान और विकास तथा नवाचार, प्रौद्योगिकी विकास एवं तैनाती शामिल हैं। इस योजना के तहत 10वीं और 12वीं के छात्र इंटर्नशिप कर सकेंगे।
बायो 3 स्कीम को भी मिली मंजूरी
इसके अलावा, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के ‘उच्च प्रदर्शन वाले बायोमैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए बायोई थ्री (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी) नीति’ के प्रस्ताव को मंजूरी दी। बायोई थ्री नीति की मुख्य विशेषताओं में विषयगत क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास और उद्यमिता को नवाचार-संचालित समर्थन शामिल है। यह बायोमैन्युफैक्चरिंग और बायो-एआई हब और बायोफाउंड्री की स्थापना करके प्रौद्योगिकी विकास और व्यावसायीकरण में तेजी लाएगा।
हरित विकास के पुनर्योजी जैव अर्थव्यवस्था मॉडल को प्राथमिकता देने के साथ-साथ, यह नीति भारत के कुशल कार्यबल के विस्तार की सुविधा प्रदान करेगी और रोजगार सृजन में वृद्धि प्रदान करेगी। यह नीति सरकार की ‘नेट जीरो’ कार्बन अर्थव्यवस्था और ‘पर्यावरण के लिए जीवनशैली’ जैसी पहलों को और मजबूत करेगी और ‘सकुर्लर बायोइकोनॉमी’ को बढ़ावा देकर भारत को त्वरित ‘हरित विकास’ के मार्ग पर ले जाएगी। बायोई थ्री नीति भविष्य को बढ़ावा देगी और आगे बढ़ाएगी जो वैश्विक चुनौतियों के लिए अधिक टिकाऊ, अभिनव और उत्तरदायी है और विकसित भारत के लिए बायो-विजन निर्धरण करेगी।
सामाजिक मुद्दों जैसे जलवायु परिवर्तन शमन, खाद्य सुरक्षा और मानव स्वास्थ्य को संबोधित करने के लिए टिकाऊ और परिपत्र प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए जीवविज्ञान के औद्योगीकरण में निवेश करने का एक उपयुक्त समय है। जैव-आधारित उत्पादों के विकास के लिए अत्याधुनिक नवाचारों को गति देने के लिए हमारे देश में एक लचीला जैव-विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना महत्वपूर्ण है। उच्च प्रदर्शन जैव-विनिर्माण दवा से लेकर सामग्री तक उत्पादों का उत्पादन करने, खेती और खाद्य चुनौतियों का समाधान करने और उन्नत जैव-प्रौद्योगिकीय प्रक्रियाओं के एकीकरण के माध्यम से जैव-आधारित उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा देने की क्षमता है।
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