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मुंबई | संसद वाणी | विशेष संवाददाता
सामना नगर, मालवणी गेट नंबर 8 स्थित मालवणी स्वप्नपूर्ति सोसायटी को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। सोसायटी के अध्यक्ष पर फेडरेशन बनाकर म्हाडा की आपातकालीन जगह पर अवैध पार्किंग संचालित करने, वाहन मालिकों से वर्षों तक पार्किंग शुल्क वसूलने और कथित रूप से अवैध निर्माण करने के आरोप लगाए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, म्हाडा क्षेत्र, गोरेगांव के अधिकारियों द्वारा अवैध पार्किंग को लेकर नोटिस जारी किया गया था। बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान अवैध निर्माण को हटाने के लिए बुलडोजर तक लाया गया। इसके बाद संबंधित फेडरेशन पर ₹1,08,000 का जुर्माना भी लगाया गया।
हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसके बावजूद भी सोसायटी अध्यक्ष पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
फेडरेशन बोर्ड और सुरक्षा पर सवाल
सोसायटी के मुख्य गेट पर फेडरेशन का एक भारी बोर्ड लगाया गया है, जिसमें “सामना मित्र मंडल” के नाम के साथ अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष के नाम दर्ज हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार यह बोर्ड एक बार गिर चुका था और उसे पुनः लगाने के लिए 10–15 लोगों की आवश्यकता पड़ी थी। कुछ निवासियों ने इसे हटाने की मांग भी की, लेकिन बोर्ड फिर से स्थापित कर दिया गया।
इस मामले में म्हाडा उपनिबंधक अधिकारी बी. एस. कटरे को लिखित शिकायत दिए जाने की बात भी सामने आई है, लेकिन अब तक किसी कार्रवाई की जानकारी नहीं है।
एजीएम वीडियो फुटेज पर आरोप
आरोप यह भी हैं कि एजीएम (वार्षिक आम बैठक) की वीडियो रिकॉर्डिंग से कई महत्वपूर्ण विषयों को कथित रूप से डिलीट कर दिया गया। इस पर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अन्य आरोप
- सोसायटी में कथित रूप से वर्षों से रूम दलाली (मध्यस्थता) चलने के आरोप।
- वाहन मालिकों को गुमराह कर पार्किंग शुल्क वसूली का दावा।
- लिखित शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने का आरोप।
- अध्यक्ष द्वारा पद न छोड़ने की सार्वजनिक घोषणा की बात।
प्रमुख सवाल
- क्या एजीएम मीटिंग की वीडियो रिकॉर्डिंग में छेड़छाड़ संभव है और क्या इसकी जांच होगी?
- क्या म्हाडा की आपातकालीन जगह पर फेडरेशन के माध्यम से पार्किंग वैध मानी जा सकती है?
- फेडरेशन बोर्ड को हटाने या नियमित करने पर क्या कार्रवाई होगी?
- 15 वर्षों से कथित रूम दलाली के आरोपों की जांच कब होगी?
- लिखित शिकायतों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो सख्त कार्रवाई की जाए।
अब देखना होगा कि संबंधित प्राधिकरण इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।