तेहरान और मशहद (ईरान) — ईरान के कई प्रमुख विश्वविद्यालयों में सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार दूसरे दिन भी जारी रहे, और देश की बड़ी युवा आबादी सड़कों पर उतर आई है, जबकि अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव ने स्थिति और गंभीर बना दी है।
छात्रों ने जनवरी में हुई हिंसक कार्रवाई में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए और “तानाशाह मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाते हुए विरोध जताया। प्रदर्शन विशेष रूप से शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, अमीरकबीर विश्वविद्यालय और मशहद के कैंपसों में जोर पकड़ते दिखे।
आंतरिक अशांति और विदेश नीति के मसलों के बीच यह प्रदर्शनों का नया दौर इस समय जारी है जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौता बातचीत जारी है और अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है।
प्रमुख घटनाक्रम
- प्रदर्शन जारी: विश्वविद्यालयों में छात्रों ने तीसरे सप्ताहांत भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कई स्थानों से सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों की रिपोर्टें मिली हैं।
- याद में प्रदर्शन: ये प्रदर्शन जनवरी में हजारों की मौत और सैकड़ों गिरफ्तारियों के बाद 40वें दिन के शोक के रूप में आयोजित किए जा रहे हैं।
- घरेलू तनाव: छात्रों ने “आजादी” और “तानाशाह मुर्दाबाद” के नारे लगाए, वहीं कुछ स्थानों पर सुरक्षा बलों और छात्रों के बीच संघर्ष भी देखा गया।
अमेरिका-ईरान तनाव का असर
वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव गंभीर दिख रहा है, जिसके चलते कई देशों ने भी अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी है। भारत सहित कई देशों ने ईरान में मौजूद अपने नागरिकों को वापसी की तैयारी करने या देश छोड़ने की सलाह जारी की है।
ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर भी चर्चाएँ तेज हैं और अमेरिका द्वारा मध्य पूर्व में बढ़ाई गई सैन्य उपस्थिति के कारण क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह विरोध?
विश्लेषकों का कहना है कि यह प्रदर्शन महंगाई, राजनीतिक असंतोष, नागरिक अधिकारों की मांग और शासन परिवर्तन की लोकप्रिय आवाज का परिणाम है, जो अब पहले से कहीं अधिक व्यापक रूप ले चुका है।