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म्हाडा में भ्रष्टाचार का खेल? रोहित शिंदे और मकाने पर अवैध निर्माण और पार्किंग मामले में पक्षपात के आरोप

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मुंबई: मुंबई: महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (म्हाडा) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। मालवणी स्वप्नपूर्ति सोसायटी और फेडरेशन के अध्यक्ष बालासाहेब भगत पर अवैध निर्माण और अवैध पार्किंग के गंभीर आरोपों के बावजूद, म्हाडा अधिकारियों रोहित शिंदे और मकाने की निष्क्रियता से सवाल उठ रहे हैं। पहले उपनिबंधक बी.एस. कटरे पर पक्षपात के आरोप लगे थे, और अब रोहित शिंदे और मकाने भी शक के दायरे में हैं। सवाल यह है कि क्या म्हाडा के वाइस प्रेसीडेंट और सीईओ संजीव जायसवाल इन अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई करेंगे?

आरोपों का केंद्र: अवैध पार्किंग और निर्माण: मालवणी स्वप्नपूर्ति सोसायटी और फेडरेशन के अध्यक्ष बालासाहेब भगत को जांच में अवैध निर्माण और सरकारी जमीन पर कब्जा कर अवैध पार्किंग संचालित करने का दोषी पाया गया था। आरोप है कि इस अवैध पार्किंग के कारण 4-5 हजार लोगों की सुरक्षा खतरे में है, और वाहन मालिकों से पार्किंग के नाम पर अवैध रूप से पैसे भी वसूले जा रहे हैं। इसके बावजूद, म्हाडा ने अभी तक इस मामले में कोई FIR दर्ज नहीं की है।

म्हाडा अधिकारी निलेश मडामे ने फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव को 24 घंटे के भीतर अवैध पार्किंग बंद करने और सभी वाहनों को हटाने का नोटिस जारी किया था, जिसमें कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। लेकिन, नोटिस के बावजूद कोई वाहन नहीं हटाया गया, और अधिकारी मकाने ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया।

अवैध निर्माण पर आंख मूंदने का आरोप: निलेश मडामे ने अवैध निर्माण को लेकर भी नोटिस जारी किया था, जिसमें म्हाडा द्वारा तैयार मैप में कई अवैध निर्माणों की पहचान की गई थी। लेकिन, जब म्हाडा की टीम मौके पर पहुंची, तो केवल एक अवैध निर्माण को ध्वस्त किया गया, बाकी को अनदेखा कर दिया गया। जब मीडिया ने इस मामले में रोहित शिंदे से संपर्क किया, तो उन्होंने कॉल काट दिए और व्हाट्सएप पर पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया।

मीडिया ने शिंदे से सवाल किया कि जब सभी अवैध निर्माणों को हटाने का नोटिस जारी किया गया था, तो केवल एक को क्यों ध्वस्त किया गया? साथ ही, जब बालासाहेब भगत ने कहा कि वे खुद अवैध निर्माण हटा देंगे, तो उन्हें अनुमति क्यों दी गई? क्या यह भगत का पक्ष लेने का संकेत है? इन सवालों का जवाब न देने से शिंदे और मकाने पर पक्षपात के आरोप और गहरा गए हैं।

बी.एस. कटरे की तरह शिंदे और मकाने पर संदेह: पहले उपनिबंधक बी.एस. कटरे पर बालासाहेब भगत को बार-बार निर्दोष साबित करने का आरोप था, और अब रोहित शिंदे और मकाने की चुप्पी और निष्क्रियता से यही संदेह पैदा हो रहा है कि वे भी फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव को बचाने में लगे हैं। 23 जुलाई 2025 को @SVNEWS_MAH ने X पर एक पोस्ट में म्हाडा पर पक्षपात के आरोप लगाए, जिसमें भगत के खिलाफ कार्रवाई में देरी पर सवाल उठाए गए।

संजीव जायसवाल से कार्रवाई की उम्मीद: म्हाडा के वाइस प्रेसीडेंट और सीईओ संजीव जायसवाल, जो पारदर्शी शासन और नागरिक-केंद्रित सुधारों के लिए जाने जाते हैं, ने हाल ही में कई अहम कदम उठाए हैं। उन्होंने 17 फरवरी 2025 को एक अधिकारी के कक्ष के बाहर पैसे फेंके जाने की घटना की जांच के लिए एक समिति गठित की थी। इसके अलावा, जायसवाल ने 1,000 जर्जर इमारतों की संरचनात्मक ऑडिट और 17 रुके हुए स्लम पुनर्विकास परियोजनाओं को तेज करने के निर्देश दिए हैं।

लेकिन, मालवणी स्वप्नपूर्ति सोसायटी मामले में रोहित शिंदे और मकाने की कथित निष्क्रियता ने सवाल खड़े किए हैं। क्या जायसवाल इन अधिकारियों के खिलाफ निलंबन या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई करेंगे? यह सवाल अब आम जनता और मीडिया के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

म्हाडा की विश्वसनीयता दांव पर है। संजीव जायसवाल, जिन्होंने पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए 15 करोड़ दस्तावेजों को ऑनलाइन उपलब्ध करवाया है, अब इस मामले में निर्णायक कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है। यदि रोहित शिंदे और मकाने के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो यह म्हाडा की कार्यप्रणाली पर और सवाल उठाएगा।

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