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SANSAD VANI
मुंबई/संसद वाणी: मालाड पश्चिम के बीएमसी वॉर्ड क्रमांक 32 में उच्च न्यायालय और महाराष्ट्र सरकार के आदेशों की खुलेआम अवमानना करते हुए अवैध निर्माण का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। पठारेवाडी, मालवणी चर्च, और चिकुवाडी जैसे नो-डेवलपमेंट (ND) क्षेत्रों में बिना अनुमति के 3 से 4 मंजिला इमारतें बन रही हैं, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान और बीएमसी को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है। इस गंभीर मुद्दे को स्थानीय आमदार योगेश सागर ने विधानसभा के मानसून सत्र में जोर-शोर से उठाया, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया था। सामाजिक कार्यकर्ता और शिव सम्राट फाउंडेशन के अध्यक्ष सम्राट बागुल ने इस मामले में बीएमसी वॉर्ड ऑफिसर, ठेकेदारों, और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ MRTP एक्ट के तहत FIR दर्ज करने की मांग की है।
बागुल ने बताया कि मालाड पश्चिम के वॉर्ड 32 में अवैध निर्माण की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है। छोटे-मोटे ठेकेदार बिना किसी रचनाकार विभाग या इंजीनियर की मंजूरी के 25 हजार वर्गफुट की खुली जमीन पर 3 से 4 मंजिला इमारतें खड़ी कर रहे हैं। इन इमारतों को बनाकर बेचने का एकमात्र मकसद मुनाफा कमाना है। खास तौर पर पठारेवाडी, मालवणी चर्च, और चिकुवाडी जैसे ND क्षेत्रों में कमर्शियल गाला और कारखानों का निर्माण जोरों पर है। इन अवैध गतिविधियों के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की जा रही है, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
शिव सम्राट फाउंडेशन के अध्यक्ष सम्राट बागुल ने खुलासा किया कि इन अवैध निर्माणों से बीएमसी को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि ये निर्माण न केवल उच्च न्यायालय और महाराष्ट्र सरकार के नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं पर भी दबाव बढ़ा रहे हैं। बागुल ने बीएमसी के वॉर्ड ऑफिसर और संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन सड़कों पर उतरकर विरोध करेंगे।
आमदार योगेश सागर ने विधानसभा के मानसून सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए बीएमसी और ठेकेदारों की मिलीभगत पर सवाल खड़े किए। विधानसभा अध्यक्ष ने इस मामले में सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया था। गृहनिर्माण मंत्री एकनाथ शिंदे ने बीएमसी आयुक्त को अवैध निर्माण की सूची तैयार करने और नियमों के अनुसार कार्रवाई कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था। हालांकि, अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे स्थानीय निवासियों में आक्रोश बढ़ रहा है।
शिव सम्राट फाउंडेशन के अध्यक्ष सम्राट बागुल ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री, गृहनिर्माण मंत्री, BMC आयुक्त, और सह-आयुक्त को पत्र लिखकर तत्काल जांच की मांग की है। उन्होंने कहा, “मालाड पश्चिम में अवैध निर्माण BMC को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे हैं। यह कानून का उल्लंघन होने के साथ-साथ पर्यावरण और नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। MRTP एक्ट के तहत ठेकेदारों और लापरवाह अधिकारियों पर FIR दर्ज कर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”
बागुल ने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने समय पर कार्रवाई नहीं की, तो स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन इस मुद्दे को और तेज करेंगे। उन्होंने BMC से मांग की है कि वार्ड 32 में अवैध निर्माणों की सूची तैयार कर तत्काल ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाए।
मालाड पश्चिम में अवैध निर्माण का मुद्दा कोई नया नहीं है। 2021 में, मालवणी के न्यू कलेक्टर कंपाउंड में एक अवैध इमारत के ढहने से 11 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने BMC को अवैध निर्माणों पर सर्वे करने और ज्यूडिशियल इन्क्वायरी का आदेश दिया था। हाल ही में दादर के एक मामले में भी हाईकोर्ट ने BMC की निष्क्रियता पर नाराजगी जताते हुए एक विशेष समिति गठित की थी।
स्थानीय लोग और कार्यकर्ता लंबे समय से आरोप लगाते आ रहे हैं कि BMC और ठेकेदारों की मिलीभगत के कारण अवैध निर्माण बेरोकटोक जारी हैं। 2008 में, मालाड का P-North वार्ड BMC का सबसे भ्रष्ट वार्ड करार दिया गया था, और तब से स्थिति में सुधार की गति धीमी रही है।
सुरक्षा का संकट: बिना इंजीनियरिंग मानकों के बने ये अवैध भवन भूकंप, आग, या अन्य आपदाओं में ढह सकते हैं, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है।
पर्यावरणीय तबाही: मालवणी और चिकुवाडी जैसे क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई और अनियोजित निर्माण से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है। इससे स्थानीय जलवायु और जैव-विविधता पर गंभीर असर पड़ रहा है।
राजस्व की हानि: सम्राट बागुल के अनुसार, अवैध निर्माणों के कारण BMC को हर साल करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है, जो शहर के विकास कार्यों के लिए इस्तेमाल हो सकता था।
FIR और ध्वस्तीकरण: सम्राट बागुल और आमदार योगेश सागर ने MRTP एक्ट के तहत अवैध निर्माण करने वाले ठेकेदारों और लापरवाह BMC अधिकारियों पर FIR दर्ज करने की मांग की है।
तत्काल जांच: वार्ड 32 में अवैध निर्माणों की सूची तैयार कर ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया तुरंत शुरू हो।
पारदर्शी कार्रवाई: BMC आयुक्त से विधानसभा को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने और जनता को कार्रवाई की प्रगति से अवगत कराने की मांग।
नागरिक सहभागिता: अवैध निर्माण की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की गारंटी दी जाए।
आमदार योगेश सागर का “बयान“
मालाड पश्चिम के नागरिकों की सुरक्षा और पर्यावरण हमारी प्राथमिकता है। BMC की निष्क्रियता और ठेकेदारों की मनमानी अब बर्दाश्त नहीं होगी। हम चाहते हैं कि इस मामले में तुरंत FIR दर्ज हो और दोषियों को कठोर सजा मिले। यह मुद्दा केवल मालाड का नहीं, बल्कि पूरे मुंबई की जवाबदेही का सवाल है,” आमदार योगेश सागर ने दृढ़ता से कहा।
सम्राट बागुल ने कहा कि मालाड पश्चिम के नागरिकों से मेरा अनुरोध है कि वे अवैध निर्माणों की जानकारी BMC को दें और इस मुद्दे को उजागर करने में सहयोग करें। यह हमारी सुरक्षा, पर्यावरण, और शहर के भविष्य का सवाल है। हम मिलकर इस लड़ाई को जीतेंगे।”
मालाड पश्चिम के निवासियों और सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे पर एकजुट होकर प्रशासन से जवाबदेही की मांग की है। अगर आप भी इस मुद्दे से प्रभावित हैं, तो निम्नलिखित तरीकों से अपनी आवाज उठाएं:
BMC हेल्पलाइन: 24×7 हेल्पलाइन नंबर 1916 पर कॉल करें।
ऑनलाइन शिकायत: BMC की आधिकारिक वेबसाइट (portal.mcgm.gov.in) पर “Citizen Portal” के जरिए शिकायत दर्ज करें। शिकायत में अवैध निर्माण का पता, फोटो, और अन्य सबूत शामिल करें।
पुलिस में शिकायत: अगर BMC कार्रवाई में देरी करती है, तो मालवणी पुलिस स्टेशन में MRTP एक्ट के तहत FIR दर्ज करने की मांग करें।
मालाड पश्चिम में अवैध निर्माण का यह मुद्दा न केवल प्रशासनिक निष्क्रियता को उजागर करता है, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा, पर्यावरण, और शहर के विकास के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। आमदार योगेश सागर और सम्राट बागुल के नेतृत्व में यह मुद्दा अब विधानसभा से लेकर सड़क तक गूंज रहा है। यह देखना बाकी है कि BMC और महाराष्ट्र सरकार इस मामले में कितनी जल्दी और प्रभावी कार्रवाई करती है।
संपर्क: अवैध निर्माण की शिकायत के लिए BMC की 24×7 हेल्पलाइन 1916 पर कॉल करें या उनकी वेबसाइट portal.mcgm.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। अपनी शिकायत में निर्माण का पता, फोटो, और अन्य सबूत जरूर शामिल करें।
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