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BJP Politics: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को नई दिल्ली में एक भाषण के दौरान भारत की जनसंख्या में बदलाव को लेकर सनसनीखेज दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि 1951 से 2011 के बीच हिंदू आबादी का अनुपात 84.1% से घटकर 79% रह गया, जबकि मुस्लिम आबादी का हिस्सा 9.8% से बढ़कर 14.2% हो गया। शाह ने 2001-2011 की दशकीय वृद्धि दर का हवाला देते हुए बताया कि हिंदू आबादी में 16.8% की वृद्धि हुई, जबकि मुस्लिम आबादी 24.6% की दर से बढ़ी। उन्होंने इस असमानता का प्रमुख कारण “अवैध घुसपैठ” को ठहराया।
आंकड़ों का विश्लेषण
शाह के मुताबिक, यह बदलाव जन्म दर से नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों से हो रही अवैध घुसपैठ के कारण हुआ है। उन्होंने 1951, 1971, 1991 और 2011 की जनगणना के आंकड़ों का हवाला दिया, जिसमें हिंदू और मुस्लिम आबादी के अनुपात में निरंतर बदलाव दिखाया गया। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान हिंदू आबादी 304 मिलियन से बढ़कर 966 मिलियन और मुस्लिम आबादी 35 मिलियन से बढ़कर 172 मिलियन हुई, जो कुल मिलाकर दोनों समुदायों में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।
बिहार चुनाव से पहले का बयान
यह बयान बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आया है, जिसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है। शाह ने “डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट” (पता लगाओ, हटाओ और निर्वासित करो) की नीति की वकालत की और कहा कि सरकार अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर करने के लिए कदम उठाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि सीमावर्ती राज्यों में जनसांख्यिकीय बदलाव राष्ट्रीय संस्कृति और लोकतंत्र के लिए खतरा बन रहे हैं।
घुसपैठ पर सवाल
हालांकि, शाह के इस बयान पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि आलोचकों का कहना है कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल (2014-2024) में कथित बांग्लादेशी घुसपैठियों के निर्वासन की संख्या महज 2,566 रही, जबकि 2004-2014 के बीच 89,781 लोगों को निर्वासित किया गया। यह आंकड़ा मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी दलों द्वारा सरकार की नीतियों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
विपक्षी नेता और सोशल मीडिया यूजर्स ने शाह के बयान को चुनावी स्टंट करार दिया है। मोहम्मद जुबैर जैसे यूजर्स ने ट्वीट कर सवाल उठाया कि अगर घुसपैठ इतनी बड़ी समस्या है, तो 11 साल तक गृह मंत्री रहते हुए इस पर क्या कार्रवाई की गई। दूसरी ओर, बीजेपी समर्थकों ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर इसे जायज ठहराया है।
शाह ने एक उच्चस्तरीय जनसांख्यिकीय मिशन की घोषणा की, जो अवैध प्रवास के प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन करेगा। इस मिशन को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि यह देश की सामाजिक-धार्मिक संरचना और सीमा सुरक्षा पर गहरा असर डालेगा। लेकिन इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज होने की संभावना है, खासकर चुनावी माहौल में।
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