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मुम्बई

वशिष्ठ मीडिया का हुंकार: MHADA और फेडरेशन के खिलाफ याचिका, माकणे की भूमिका पर सवाल

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मुंबई/संसद वाणी। (एक्सक्लूसिव रिपोर्ट): मालवणी के सामना नगर, गेट नंबर 8 में MHADA की सरकारी जमीन पर अवैध पार्किंग का कारोबार जोरों पर है, और इसका मास्टरमाइंड स्वीकारोक्ति स्वयं MHADA अधिकारी एम.वी. माकणे ने मीडिया को दी है। फिर भी, नोटिस जारी करने के बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं—ना FIR, ना डिमोलिशन। रोड लॉक, फायर ब्रिगेड का रास्ता ब्लॉक, और 4-5 हजार निवासियों की जान जोखिम में। क्या माकणे को ‘किसी का डर’ नहीं? या फेडरेशन के अध्यक्ष-सचिवों को बचाने का ‘गेम’ चल रहा है? वशिष्ठ मीडिया हाउस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक एवं समूह दैनिक समाचार पत्र के स्वामी/प्रकाशक अभिषेक अनिल वशिष्ठ ने अपने लीगल सलाहकार एडवोकेट ओम प्रकाश मिश्रा के माध्यम से कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है। यह याचिका न केवल अवैध निर्माण और पार्किंग को उजागर करेगी, बल्कि MHADA अधिकारियों की निष्क्रियता पर भी सवाल खड़े करेगी। क्या अब सिस्टम हिलेगा?

वशिष्ठ मीडिया हाउस प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा म्हाडा और फेडरेशन के खिलाफ कोर्ट में याचिक दाखिल..

अवैध पार्किंग का ‘डार्क नेटवर्क’: भगत का कंट्रोल, सोसाइटीज की मिलीभगत

सामना नगर मालवणी गेट नं 8 MHADA कॉलोनी में स्वप्नपूर्ति सोसायटी और फेडरेशन के अध्यक्ष बालासाहेब भगत ने सरकारी खाली जगह पर कब्जा कर अवैध पार्किंग शुरू कराई। रोड के दोनों तरफ वाहन खड़े करवाकर पूरा रास्ता लॉक कर दिया जाता है, जिससे एम्बुलेंस या फायर ट्रक की एंट्री असंभव हो जाती। निवासियों का आरोप है कि मालवणी ओम सिद्धिविनायक सोसायटी के अध्यक्ष-सचिव, मालवणी डायमंड प्लाजा के सचिव, और साईं श्रद्धा सोसायटी के सभी कमेटी सदस्य भगत के इस ‘गलत कार्य’ में साथ दे रहे हैं। कई वर्षों से लोगों से पार्किंग राशि (प्रति माह) वसूली हो रही है, जो MCS Act (महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम) की धारा 78 का घोर उल्लंघन है।

एक प्रभावित निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “भगत साहब ने फायर एग्जिट पर पार्किंग की अनुमति किसने दी? कल को बिल्डिंग में दुर्घटना हुई, तो जिम्मेदारी कौन लेगा? 2018 के सरगम सोसायटी फायर केस की याद आती है, जहां पार्किंग ब्लॉकेज से 5 मौतें हुईं। यहां 4-5 हजार लोगों की जान दांव पर है!” हालिया पुलिस रिपोर्ट्स से भी मालवणी में पार्किंग माफिया का खौफ साफ झलकता है—अगस्त 2025 में ओला ड्राइवर साहिल गुज्जर की हत्या अवैध वसूली से जुड़ी थी, और मालवणी पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया। लेकिन MHADA की भूमिका? सिर्फ नोटिस!

यह वीडियो देखें: Mhada के अधिकारियों पर लगे गंभारी आरोप.. क्या म्हाडा पक्षपात कर रही हैं..?

म्हाडा अधिकारी द्वारा नोटिस जारी।

MHADA अधिकारी माकणे की ‘चुप्पी’: नोटिस तो जारी, FIR क्यों नहीं?

MHADA अधिकारी एम.वी. माकणे ने मीडिया को स्वीकार किया कि अवैध निर्माण, पार्किंग और अन्य गतिविधियों का ‘मास्टरमाइंड’ बालासाहेब भगत है। जनवरी 2025 के सर्कुलर के तहत नोटिस जारी कर पार्किंग बंद करवाई, लेकिन उसके बाद? कुछ नहीं। माकणे का तर्क: “हमने नोटिस जारी कर दिया, अब आगे क्या कर सकते हैं?” निवासी सवाल उठाते हैं—क्या MHADA Act 1976 (धारा 65-79A) के तहत डिमोलिशन, जुर्माना (₹5,000 से ₹1 लाख), या IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत FIR दर्ज करने की पावर का इस्तेमाल नहीं हो सकता? फेडरेशन के अध्यक्ष-सचिवों पर कार्रवाई क्यों नहीं?

फायर ब्रिगेड बोरीवली के अधिकारियों द्वारा म्हाडा और कांदिवली ट्रैफिक विभाग को पत्र द्वारा शिकायत के बाद भी म्हाडा के अधिकारी माकणे सोए हुए हैं।

हैरानी की बात: माकणे को ‘फायर ब्रिगेड का वाहन अंदर आए या न आए, दुर्घटना हो या न हो’ उससे कोई मतलब नहीं लगता। बॉम्बे हाईकोर्ट ने अप्रैल 2025 में घाटकोपर अवैध हॉल केस में MHADA को “कॉलोसल मिसयूज ऑफ अथॉरिटी” कहकर फटकार लगाई, और डेमोलिशन का आदेश दिया। CAG की 2017 रिपोर्ट में भी MHADA पर FSI उल्लंघन और 16.30 करोड़ की बर्बादी का आरोप लगा। क्या मालवणी का केस भी इसी भ्रष्टाचार का चक्रव्यूह है? ACB (एंटी-करप्शन ब्यूरो) ने हाल ही में MHADA इंजीनियर रंजीत चव्हाण को 7 लाख रिश्वत लेते पकड़ा—क्या माकणे का मामला भी इसी कड़ी का हिस्सा है?


जनता की चुप्पी टूटी: वशिष्ठ मीडिया हाउस की कोर्ट याचिका, सिस्टम पर ब्रेकिंग पॉइंट

मालवणी के निवासी चुप थे, लेकिन अब आवाज बुलंद हो रही है। वशिष्ठ मीडिया हाउस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक एवं समूह दैनिक समाचार पत्र के स्वामी/प्रकाशक अभिषेक अनिल वशिष्ठ ने इसे बर्दाश्त नहीं किया। उनके लीगल सलाहकार एडवोकेट ओम प्रकाश मिश्रा ने सिविल कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है, जिसमें अवैध पार्किंग बंद करने, राशि वसूली रोकने, और MHADA अधिकारियों की निष्क्रियता पर जांच की मांग की गई है। याचिका में MCS Act धारा 73(1AB) के तहत भगत और अन्य कमेटी सदस्यों को अयोग्य घोषित करने, साथ ही FIR दर्ज करने का निर्देश मांगा गया है।

अभिषेक अनिल वशिष्ठ ने कहा, “यह सिर्फ पार्किंग का मुद्दा नहीं, बल्कि जानलेवा लापरवाही है। MHADA अधिकारी फेडरेशन को बचा रहे हैं, लेकिन जनता की सुरक्षा कौन करेगा? कोर्ट से न्याय की उम्मीद है—यह याचिका सिस्टम को हिलाने का पहला कदम है।” RTI दस्तावेजों से भी साफ है कि गायकवाड़ नगर गेट नंबर 8 में MHADA जगह पर ‘डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी फेडरेशन’ के नाम पर अवैध वसूली हो रही है।

निवासियों की मांग: FIR, जांच, और तत्काल कार्रवाई

निवासी अब DRCS (डेप्युटी रजिस्ट्रार ऑफ को-ऑपरेटिव सोसाइटीज) और MHADA हेल्पलाइन (022-66405363) पर शिकायतों का दौर चला रहे हैं। वे MCS Act धारा 78A के तहत कमेटी सदस्यों को हटाने और जुर्माना लगाने की मांग कर रहे हैं। एक निवासी बोले, “हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना चाहिए। माकणे साहब को ‘डर’ क्यों नहीं लगता? क्या ऊपर से ‘सुरक्षा’ मिली हुई है?”

MHADA ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन सर्कुलर के मुताबिक अवैध संरचनाओं पर तत्काल कार्रवाई जरूरी है। मुंबई का पार्किंग संकट गहराता जा रहा—नई वाहन रजिस्ट्रेशन के लिए प्रूफ अनिवार्य, लेकिन अवैध कारोबार फल-फूल रहा। क्या वशिष्ठ की याचिका MHADA को झकझोर देगी, या भ्रष्टाचार की जड़ें और मजबूत होंगी? जनता की चुप्पी टूट चुकी—अब न्याय की बारी!

अवैध निर्माण के खिलाफ म्हाडा अधिकारी द्वारा नोटिस जारी, पर फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव के ऊपर FIR दर्ज नहीं।

ब्ल्यू प्रिंट जिसमें साफ देखा जा सकता है कि फेडरेशन के द्वारा कई सारे अवैध निर्माण और कार्य किए गए हैं।

सबूत..

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