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नई दिल्ली, 6 फरवरी 2026: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई 9 फरवरी 2026 तक के लिए स्थगित कर दी है। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो द्वारा दायर यह याचिका राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत उनके पति की हिरासत की वैधता को चुनौती देती है।
सुनवाई टलने की वजह:
सुप्रीम कोर्ट की बेंच — जिसमें न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले शामिल हैं — ने मामले पर विस्तृत दलीलों और केंद्र के पक्ष से दिये गये जवाबों को सुनने के बाद निर्णय लिया कि आगे की सुनवाई 9 फरवरी 2026 को होगी। अदालत ने बुधवार को केंद्र से यह भी पूछा कि क्या वांगचुक की बिगड़ती सेहत को ध्यान में रखते हुए हिरासत पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
केंद्र का पक्ष:
केंद्र और लद्दाख प्रशासन ने अदालत को बताया कि वांगचुक को सीमावर्ती क्षेत्र में लोगों को उकसाने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। सरकार का तर्क है कि उनकी गतिविधियाँ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंतित करने वाली थीं, और हिरासत का आदेश जारी करते समय सभी “प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों” का पालन किया गया।
प्रतिवादी का पक्ष:
गीतांजलि आंगमो ने अदालत में दावा किया है कि वांगचुक के खिलाफ लगाए गए आरोप तर्कहीन हैं और उनकी हिरासत मनमानी है, जो उनके बुनियादी संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। वांगचुक स्वयं इन आरोपों से इनकार कर चुके हैं और कहा है कि शांतिपूर्ण आलोचना और विरोध करना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।
पृष्ठभूमि:
सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को NSA के तहत हिरासत में लिया गया था, कुछ ही दिनों बाद लद्दाख में हिंसक प्रदर्शन हुए थे जिनमें चार लोगों की मौत और कई घायल हुए थे। केंद्र का आरोप है कि वांगचुक ने विरोध को भड़काया, जबकि उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने शांति की अपील की थी।
अब अगली सुनवाई 9 फरवरी 2026 को होगी, जब कोर्ट दोनों पक्षों की दलीलों और सबूतों पर आगे विचार करेगा।