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Kolkata Horror: सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा की पीठ ने घटना की श्रृंखला में इस दस्तावेज की अहमियत को स्वीकार किया. सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हमें आरजी कर सीसीटीवी का सिर्फ 27 मिनट का डेटा दिया गया है.
कोलकाता के आरजी कर अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में बलात्कार और हत्या की शिकार डॉक्टर के शव मिलने के बाद मामले को छुपाने की कोशिश पर संदेह जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बंगाल सरकार से सवाल किए. कोर्ट ने पूछा कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज फाइलों से कैसे गायब हो सकता है? इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है. कोर्ट ने यह निर्देश तब दिया जब एक पक्ष ने उसके सामने यह तर्क रखा कि पीड़िता-डॉक्टर के कपड़ों को पोस्टमार्टम के समय सील करके पोस्टमार्टम टीम को नहीं भेजा गया.
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा की पीठ ने घटना की श्रृंखला में इस दस्तावेज की अहमियत को स्वीकार किया. सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हमें आरजी कर सीसीटीवी का सिर्फ 27 मिनट का डेटा दिया गया है. आरजी कर बलात्कार-हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कोलकाता पुलिस ने केंद्रीय एजेंसी को पीड़िता के शरीर और कपड़ों की स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी देने वाली पुलिस की रिपोर्ट नहीं सौंपी है, जैसा कि अपराध स्थल पर पाया गया था.
पश्चिम बंगाल के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अधिवक्ता आस्था शर्मा ने माना कि उनके अधिकारियों द्वारा लाई गई कोलकाता पुलिस की फाइलों में यह दस्तावेज नहीं था. सिब्बल ने कहा कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने खुद फॉर्म भरा और डॉक्टर को दिया.
बिना पोस्टमॉर्टम कैसे किया जा सकता है?
सीजेआई ने पूछा, ‘इस दस्तावेज़ के बिना पोस्टमॉर्टम कैसे किया जा सकता है?” जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाने वाले कांस्टेबल को यह दस्तावेज़ ले जाना ज़रूरी है. इसे खाली कर दिया गया है. आपको स्पष्टीकरण देना होगा. अगर यह दस्तावेज़ गायब पाया जाता है, तो कुछ बहुत बड़ी गड़बड़ी है. यह दस्तावेज़ (जांच के लिए) बहुत महत्वपूर्ण है और इसका बहुत महत्व है क्योंकि इसमें अपराध के समय पीड़िता द्वारा पहने गए कपड़े और वस्त्र दर्ज होंगे, जिसके साथ शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया था. पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर के लिए इस दस्तावेज़ के बिना शव को स्वीकार करना असंभव है.’
सिब्बल ने कहा कि राज्य इस बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए हलफ़नामा दायर करेगा. वकील, जिन्होंने सबसे पहले इस गायब दस्तावेज़ की ओर अदालत का ध्यान आकर्षित किया ने पीठ को बताया कि यह दस्तावेज उस सीडी का हिस्सा था जिसे हाईकोर्ट को सौंपा गया था.
सिर्फ 27 मिनट की सीसीटीवी फुटेज
सीजेआई ने यह भी पूछा कि क्या सीबीआई को पूरी सीसीटीवी फुटेज सौंपी गई है, जिसमें पीड़िता के आराम करने के लिए सेमिनार हॉल में प्रवेश करने से लेकर अपराध स्थल से आरोपी के प्रवेश और बाहर निकलने और शव मिलने तक की फुटेज शामिल है? इसपर एसजी ने कहा, ‘सीबीआई के साथ जो साझा किया गया है, वह सीसीटीवी फुटेज की चार वीडियो क्लिप हैं, जो शाम 5.06 बजे से रात 10.45 बजे के बीच कुल 27 मिनट की हैं.’
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