मातम में सोनभद्र: खदान धंसी, 5 मजदूरों की मौत; कई जिंदगियां दबीं

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सोनभद्र (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में हुआ भीषण खदान हादसा पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे में डुबो गया है। 15 नवंबर 2025 की दोपहर, ओबरा थाना क्षेत्र के बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र स्थित मे० कृष्णा माइनिंग वर्क्स (M/s Krishna Mining Works) की पत्थर खदान अचानक भरभरा कर ढह गई। यह हादसा उस वक्त हुआ, जब ड्रिलिंग का काम चल रहा था और ऊपर से एक विशाल चट्टान नीचे काम कर रहे मजदूरों पर आ गिरी। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुर्घटना के लगभग 36 घंटे बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

घटना का विवरण

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में हुई यह भीषण त्रासदी 15 नवंबर 2025 की दोपहर को तब हुई, जब ओबरा थाना क्षेत्र के बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र स्थित मे० कृष्णा माइनिंग वर्क्स की पत्थर खदान अचानक भरभरा कर ढह गई। यह दुर्घटना उस समय घटी जब मजदूर ड्रिलिंग का काम कर रहे थे, और ऊपर की एक विशाल चट्टान नीचे काम कर रहे कर्मचारियों पर आ गिरी। इस हादसे के कारण अब तक 4 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि अनुमान है कि लगभग 9 से 15 मजदूर अभी भी खदान के मलबे और भारी-भरकम चट्टानों के नीचे फंसे हुए हैं, जिसके चलते बचाव कार्य लगातार जारी है।


मलबे में दबी उम्मीदें और सिसकते परिवार

इस त्रासदी में अब तक चार मजदूरों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें पनारी गांव के दो सगे भाई, इंद्रजीत यादव और संतोष यादव भी शामिल हैं। इनके अलावा अमरेनिया निवासी राजू गोंड और कोन क्षेत्र के कचनरवा निवासी रविंद्र उर्फ नानक का शव भी निकाला गया है। ये नाम अब सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि ये वे मेहनतकश हाथ थे जो अपने परिवार के लिए रोटी कमाने आए थे, लेकिन खदान के अंधेरे में ही समा गए।

प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों के शुरुआती अनुमान के मुताबिक, हादसे के समय खदान में करीब 12 से 15 मजदूर काम कर रहे थे। अभी भी कई जिंदगियाँ 75 टन वजनी विशाल चट्टानों और मलबे के नीचे दबी होने की आशंका है। NDRF और SDRF की टीमें लगातार बचाव कार्य में जुटी हुई हैं, लेकिन भारी-भरकम चट्टानों के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।


लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल

इस हादसे ने एक बार फिर खनन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और अवैध खनन के गंभीर मुद्दे को उजागर कर दिया है। राज्य मंत्री संजीव गोंड ने भी इस पर चिंता जताते हुए कहा है कि जब खदान बंदी का आदेश था, तब भी काम कैसे चल रहा था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध खनन और लापरवाही ही इस बड़े हादसे की मुख्य वजह है। प्रशासन ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

सोनभद्र में हर गुजरता पल फंसे हुए मजदूरों के परिवारों के लिए बेचैनी और दर्द लेकर आ रहा है। उनकी आँखें अब भी मलबे की ओर टिकी हैं, इस उम्मीद में कि उनका कोई अपना सकुशल बाहर निकल आए। यह हादसा सिर्फ एक खदान दुर्घटना नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था पर भी एक सवाल है, जो गरीब मजदूरों की सुरक्षा को ताक पर रखकर मुनाफे को प्राथमिकता देती है।