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Breaking News: एक समय देश के लिए जान जोखिम में डालने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) के पूर्व कमांडो बाजरंग सिंह, जो 2008 के मुंबई 26/11 आतंकी हमलों में ताज होटल पर हमले के दौरान आतंकवादियों से लोहा ले चुके थे, अब ड्रग तस्करी के काले धंधे में फंस चुके हैं। राजस्थान पुलिस की एंटी-टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने ‘ऑपरेशन गंजनेय’ के तहत उन्हें चूरू जिले के रतनगढ़ से गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से करीब 200 किलो गांजा बरामद हुआ है, जो तेलंगाना और ओडिशा से राजस्थान में तस्करी की गई सामग्री साबित हो रहा है। इस गिरफ्तारी पर पुलिस ने 25,000 रुपये का इनाम घोषित किया था।
गिरफ्तारी का विवरण: दो महीने की खुफिया निगरानी का नतीजा
पुलिस के अनुसार, बाजरंग सिंह की गिरफ्तारी 1 अक्टूबर की देर रात को हुई। इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IGP) विकास कुमार ने बताया कि ATS और ANTF की संयुक्त टीम ने दो महीने से अधिक समय से उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। खुफिया जानकारी के आधार पर शुरू हुए इस ऑपरेशन में तकनीकी साधनों और जमीन पर सूत्रों की मदद से सिंह को ट्रैक किया गया। वह फर्जी मोबाइल आईडी का इस्तेमाल करता था, दूरदराज के गांवों में छिपता रहता था और एक विश्वसनीय ओडिया कुक को हमेशा साथ रखता था, जो उसकी पहचान का सुराग बना।
IGP कुमार ने कहा, “यह ऑपरेशन हफ्तों की योजना और खुफिया साझेदारी का परिणाम है। बाजरंग जैसे कट्टर अपराधी की गिरफ्तारी राजस्थान में आतंक-नारकोटिक्स नेक्सस को कमजोर करने में बड़ी सफलता है।” पुलिस को शक है कि सिंह न केवल तस्करी का मास्टरमाइंड था, बल्कि ओडिशा और तेलंगाना के आपराधिक तत्वों से जुड़ा हुआ था। इससे पहले 2023 में हैदराबाद के पास उसे दो क्विंटल गांजे की तस्करी के लिए गिरफ्तार किया जा चुका था, लेकिन वह जमानत पर बाहर आ गया था।
बाजरंग सिंह का सफर: दशहरे से अपराध की दुनिया तक
सिकर जिले के करंगा गांव के रहने वाले बाजरंग सिंह ने 10वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। कुश्ती के शौकीन बाजरंग ने बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) में प्रवेश किया, जहां उन्होंने संक्षिप्त सेवा की। बाद में उनकी क्षमता देखते हुए उन्हें NSG में भर्ती किया गया, जहां उन्होंने सात साल तक सेवा की। 26/11 के हमलों के दौरान वह मुंबई गए कमांडो दस्ते का हिस्सा थे, जहां उन्होंने ताज होटल में पाकिस्तानी आतंकवादियों से सीधी लड़ाई लड़ी। उस समय वह देश के नायकों में शुमार थे।
NSG से सेवानिवृत्ति के बाद बाजरंग ने अपराध की राह पकड़ ली। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, BSF के दौरान ओडिशा में पोस्टिंग के समय बने संपर्कों ने उन्हें गांजे के व्यापार की ओर धकेला। उन्होंने धीरे-धीरे ओडिशा और तेलंगाना के तस्करों से गठजोड़ किया और राजस्थान में वितरण नेटवर्क स्थापित कर लिया। गांव में अपनी इज्जत का फायदा उठाकर वह आतंक से जुड़ी गतिविधियों में भी लिप्त होने का शक है।
नारकोटिक्स तस्करी पर बड़ा झटका
इस गिरफ्तारी से राजस्थान-ओडिशा-तेलंगाना के बीच सक्रिय बड़े पैमाने पर गांजे की तस्करी पर ब्रेक लग सकता है। पुलिस का मानना है कि बाजरंग का गिरोह न केवल ड्रग्स की सप्लाई करता था, बल्कि आतंकी संगठनों को फंडिंग भी उपलब्ध करा रहा था। पूछताछ में और कई सहयोगियों के नाम सामने आने की संभावना है।
कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच
बाजरंग सिंह को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटांस (NDPS) एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया है। चूरू पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कर लिया गया है, और पूछताछ जारी है। ATS और ANTF अब उसके बैंक खातों, संपत्तियों और संपर्कों की जांच कर रही हैं।
यह घटना देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक सबक है कि पूर्व सैनिक भी आर्थिक लालच में अपराध की ओर मुड़ सकते हैं। बाजरंग सिंह का मामला न केवल ड्रग तस्करी का, बल्कि आतंक-नारकोटिक्स कनेक्शन का भी उदाहरण है।
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