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जहाँ एक ओर आम जनता ट्रैफिक नियमों का पालन कर नियमों के शिकंजे में फंसती है, वहीं दूसरी ओर बड़े प्रतिष्ठान और प्रभावशाली लोग खुलेआम फुटपाथ और सड़क पर पार्किंग कर रहे हैं। मलाड वेस्ट स्थित जैन सबकुछ फूड प्लाजा, मोदी हुंडई मलाड शोरूम और टाटा मोटर्स कार शोरूम के बाहर यह दृश्य दिन-प्रतिदिन सामान्य होता जा रहा है।
लेख: अभिषेक अनिल वशिष्ठ (वशिष्ठ मीडिया हाउस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक एवं समूह दैनिक समाचार पत्र के स्वामी/प्रकाशक)
सवाल उठता है कि क्या कानून सभी के लिए बराबर है? हमारी मीडिया ने इस विषय पर 8 और 9 फरवरी को सवाल उठाया। RTO और BMC को बार-बार नोटिस दिए गए, लेकिन जवाब केवल आधिकारिक शब्दों तक सीमित रहा। अब तो ऐसा लगता है जैसे अधिकारियों ने “ठान लिया” है कि मीडिया कितनी भी आवाज़ उठाए, कुछ भी कार्रवाई नहीं होगी।
यह वही स्थिति है जैसी अक्सर विदेश नीति के संवेदनशील मामलों में दिखती है—जहाँ प्रधानमंत्री चुप रहते हैं, वहाँ मीडिया सवाल उठाता है, लेकिन जवाब या कार्रवाई न के बराबर। मलाड वेस्ट में VIP द्वारा फुटपाथ पर की जा रही अवैध पार्किंग के मामले में भी प्रशासन उसी तरह शांत है, जैसे यह कोई मामूली समस्या हो।
क्या RTO और BMC अधिकारी वास्तव में ट्रैफिक नियमों को लागू करने के लिए बनाए गए हैं, या केवल “सिस्टम में बैठे अपने काम” देख रहे हैं? आम आदमी पर तुरंत कार्रवाई, VIP पर खामोशी — यह न केवल नियमों की असमानता है, बल्कि प्रशासनिक मनमानी भी है।
नियम सभी के लिए समान होना चाहिए, न कि केवल आम जनता के लिए।
यदि कोई छोटा दुकानदार या आम नागरिक नियम तोड़े, तो तुरंत चालान और टोइंग।
वहीं VIP द्वारा फुटपाथ पर कब्ज़ा, पार्किंग और अतिक्रमण — और अधिकारियों की चुप्पी — यह संदेश देता है कि “हमारा मुनाफा और सुविधा पहले, जनता बाद में।”
मीडिया द्वारा सवाल उठाने, प्रमाण पेश करने और रिपोर्ट प्रकाशित करने के बावजूद कार्रवाई न होना यह दिखाता है कि सिस्टम फेल है, और बड़े अधिकारी अपनी “सुविधा” के अनुसार ही निर्णय ले रहे हैं।
अब प्रश्न यही है—कब तक आम नागरिक नियमों के शिकंजे में फँसते रहेंगे, और VIP के लिए नियमों की यह छूट जारी रहेगी?
जब सिस्टम इस स्तर तक निष्क्रिय हो जाए, तब जनता को भी सवाल उठाना ही जवाबदेही बन जाता है।