Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
मुंबई, मालाड (विशेष जांच दल): सत्ता का संरक्षण जब अपराध और भ्रष्टाचार को मिलने लगे, तो जनता का सिस्टम से भरोसा उठ जाता है। मालाड (वार्ड 35) की ‘कोयला वाली गली’ आज इसी कड़वे सच की गवाह बन गई है। ‘संसद वाणी’ के पास मौजूद पुख्ता जानकारी के अनुसार, रेलवे ट्रैक के पास नियमों को कुचलकर माफिया कर्सन द्वारा खड़ी की गई अवैध इमारतें न केवल कानून को चुनौती दे रही हैं, बल्कि केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और स्थानीय नगरसेवक योगेश वर्मा की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं।
दिखावे का ‘क्रेडिट’ और माफिया को ‘अभयदान’?
हैरानी की बात यह है कि मालाड के भाजपा नेता छोटे-मोटे अवैध निर्माणों पर कार्रवाई का ढिंढोरा पीटकर ‘क्रेडिट’ लेने की होड़ में रहते हैं। लेकिन जब बात कर्सन जैसे रसूखदार माफिया की आती है, तो इन नेताओं की जुबान पर ताला क्यों लग जाता है?
क्या कर्सन का यह अवैध किला भाजपा के ‘सुशासन’ से बड़ा है?
क्या रेलवे की सुरक्षा को ताक पर रखकर बनाया गया यह निर्माण किसी बड़े हादसे की साजिश है?
पीयूष गोयल के क्षेत्र में ‘बहरा’ हुआ प्रशासन!
सांसद पीयूष गोयल देश के बड़े कद के नेता हैं, लेकिन उनके अपने संसदीय क्षेत्र में जब जागरूक नागरिकों पर माफिया जानलेवा हमले करते हैं, तो वे मौन रहते हैं। ‘संसद वाणी’ और ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा लगातार खबरें पब्लिश होने के बावजूद,
बीएमसी अधिकारी कुंदन वाल्वी की बेखौफ कार्यप्रणाली यह साबित करती है कि ऊपर से नीचे तक ‘सांठगांठ’ का जाल बिछा हुआ है।
“सरकार हमारी है, हम कुछ भी करें” – क्या यही है हकीकत?
भाजपा के स्थानीय नेताओं में यह अहंकार घर कर गया है कि मीडिया में मुद्दा उछलने से उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा क्योंकि सत्ता उनके पास है। लेकिन उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि जनता ने उन्हें ‘सेवक’ बनाकर भेजा था, ‘माफिया का साझेदार’ बनने के लिए नहीं।
संसद वाणी का संकल्प: हम इस मुद्दे को तब तक नहीं छोड़ेंगे जब तक रेलवे ट्रैक के पास खड़ा यह ‘अवैध किला’ जमींदोज नहीं हो जाता और भ्रष्ट अधिकारी कुंदन वाल्वी व लापरवाह नगरसेवक योगेश वर्मा की जवाबदेही तय नहीं हो जाती।