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मुम्बई

9 दिन बाद भी वाहन बाहर नहीं हुआ.. अगर बिल्डिंग में कुछ भी हुआ तो उसका जिम्मेदार म्हाडा होगी..

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• क्या म्हाडा अधिकारियों द्वारा नोटिस जारी कर टाइम पास किया जा रहा है..?

• म्हाडा ने जब नोटिस में २४ घंटे का समय दिया तो फिर किस बात का इंतजार किया जा रहा है..?

• क्या म्हाडा अधिकारियों द्वारा सिर्फ दिखावा के लिए नोटिस जारी किया था..?

• 9 दिन बाद फेडरेशन के अध्यक्ष ने भी अपनी ऑटो रिक्शा बाहर नहीं किया..

• म्हाडा अधिकारियों द्वारा और फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव द्वारा नोटिस खेलने के चक्कर में लोगों के जान से खिलवाड़ किया जा रहा है..

मुम्बई/संसद वाणी। सामना नगर मालवाणी गेट नं 8 पर, फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव द्वारा अवैध पार्किंग करवा रोड़ को लॉक कर दिया गया था, और यह अवैध पार्किंग का कार्य ५ वर्षों से किया जा रहा था, जब इसकी शिकायत फायर ब्रिगेड के अधिकारियों ने म्हाडा से लिखित शिकायत की तो, म्हाडा के अधिकारियों ने फेडरेशन को दिनांक 25 फरवरी को नोटिस जारी किया गया था, नोटिस में म्हाडा अधिकारियों द्वारा यह लिखा गया था कि अगर 24 घंटे में सभी वाहन बाहर नहीं किया गया तो फिर फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव के खिलाफ एमआरटीपी एमआरटीपी अधिनियम की धारा 52, 53 के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। पर 9 दिन बीत गए, ना ही फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव ने वाहन को बाहर करवाया और ना ही म्हाडा ने फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव के ऊपर FIR दर्ज करवा, आपको बता दें कि 9 दिनों में सिर्फ यही हुआ है कि फेडरेशन ने सभी वाहन मालिकों को नोटिस जारी करके अपने हाथ ऊपर खड़े कर दिए, अब फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव का कहना है कि उन्होंने सभी वाहन मालिकों को नोटिस जारी कर दिया अब वह वाहन बाहर करें या ना करें, उससे फेडरेशन से कुछ भी लेना देना नहीं है, अब म्हाडा अधिकारियों को यह पता होना चाहिए कि जब पार्किंग के लिए फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव ने सभी वाहन मालिकों को पत्र जारी करके जगह दी है तो वाहन बाहर कराने के लिए कोई और आएगा, यह तो फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव का ही कार्य है, अब नोटिस जारी करके फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव कैसे अपने कर्तव्यों से छुटकारा नहीं पा सकते हैं..?

इस विषय पर हमारे मीडिया ने म्हाडा अधिकारी से पूछा कि आपने फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव को नोटिस भेजा था, और अभी तक सारे वाहन बाहर नहीं हुए है तो म्हाडा अधिकारी ने जवाब दिया कि वह फेडरेशन को एक और नोटिस जारी करेंगे, अब यह समझना मुश्किल है कि म्हाडा अधिकारियों द्वारा जो पहला नोटिस जारी किया था, क्या वह दिखावा था..? अगर नहीं तो २४ घंटे बीत जाने के बाद फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव के ऊपर FIR दर्ज क्यों नहीं कराया गया..? अब यह सब से तो साफ दिख रहा है कि म्हाडा अधिकारियों द्वारा सिर्फ और सिर्फ नोटिस – नोटिस खेला जा रहा है, अब दुबारा म्हाडा अधिकारियों द्वारा फेडरेशन को नोटिस जारी किया जाएगा और फेडरेशन फिर वाहन मालिकों को नोटिस जारी कर देंगे, यही चलता रहेगा, और लोगों के जान से खिलवाड़ होता रहेगा।

फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव ५ वर्षों से लोगों के जान से खिलवाड़ कर रहे थे, और सभी वाहन मालिकों धोखे में रख कर पार्किंग का राशि वसूली किया करते थे, पर म्हाडा अधिकारियों को उससे क्या लेना देना है, वह तो फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव के खिलाफ नोटिस जारी करके म्हाडा भी अपने कर्तव्यों से छुटकारा पा लिए, अब उसके बाद फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव जगह खाली करे, या ना करे उसके बाद क्या लेना देना है..?


अब यह सब देख यही लगता है कि बिल्डिंग में अगर कोई घटना हुई और उसे रोकने के लिए फायर ब्रिगेड के वाहन अंदर नहीं आ पाए तो अब सारी जिम्मेदारी म्हाडा अधिकारियों की होगी, क्योंकि अब जो भी देरी की जा रही है वह म्हाडा के अधिकारियों द्वारा ही की जा रही है।



हम म्हाडा अधिकारियों को यह भी सूचित करते हैं कि अगर उनके द्वारा जल्दी कोई कार्रवाई नहीं की गई तो फिर हमारी मीडिया म्हाडा अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा, जिसके बाद म्हाडा अधिकारियों को कोर्ट में जवाब देना होगा कि जब फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव ने 24 घंटों में जगह को खाली नहीं किया तो म्हाडा अधिकारियों द्वारा फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव पर FIR दर्ज क्यों नहीं किया गया..? सवाल यह भी उठेगा कि नोटिस में जो धाराएं लिखी गई थी क्या वह सिर्फ डराने के लिए था..? सवाल यह भी उठेगा कि जब फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव द्वारा 9 दिनों में सभी वाहन को बाहर नहीं किए गए तो क्या म्हाडा के फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव को बचाने में जुट गए हैं..? अब यह सवाल तो उठेगा ही, क्योंकि फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव ५ वर्षो तक खुलेआम पार्किंग के चक्कर में लोगों के जान से खिलवाड़ करती रही, ५ वर्षों तक फेडरेशन के सदस्यों ने सभी वाहन मालिकों को धोखे में रख कर पार्किंग का चार्ज वसूली किया करते थे, और जब म्हाडा अधिकारियों को यह पता चला तो दिखावा के लिए म्हाडा नोटिस जारी कर दिया, बाकी कुछ भी नहीं।

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