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भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) में जनवरी के पहले सप्ताह में लगभग $9.8 अरब (लगभग $10 अरब) की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जारी साप्ताहिक आंकड़ों के मुताबिक, 2 जनवरी को समाप्त सप्ताह में भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार घटकर $686.80 अरब रह गया।
गिरावट के प्रमुख कारण
- विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (Foreign Currency Assets) में लगभग $7.62 अरब की कमी आई, जो भंडार में गिरावट का मुख्य कारण बनी।
- सोने के भंडार (Gold Reserves) का मूल्य भी लगभग $2.06 अरब कम हो गया, जिससे कुल गिरावट में वृद्धि हुई।
- इसके अलावा, विशेष आहरण अधिकार (SDRs) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत की रिज़र्व स्थिति में भी मामूली कमी देखी गई।
गिरावट के पीछे की पृष्ठभूमि
यह गिरावट ऐसे समय में हुई है जब पिछले कुछ हफ्तों में भंडार में बढ़ोतरी देखी जा रही थी, और यह लगभग एक साल में सबसे तेज साप्ताहिक गिरावट के तौर पर दर्ज की गई है। RBI द्वारा विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिये डॉलर की बिक्री भी एक वजह रही है।
इसका क्या मतलब है?
- विदेशी मुद्रा भंडार देश के आर्थिक स्वास्थ्य और अंतरराष्ट्रीय भुगतान क्षमता का महत्वपूर्ण संकेतक होता है।
- अल्पकालिक उतार-चढ़ाव सामान्य हैं, लेकिन यह गिरावट रिज़र्व बैंक के रुपये को स्थिर रखने के प्रयास और वैश्विक मौद्रिक परिस्थितियों का परिणाम भी हो सकती है।
- RBI ने पहले ही कहा था कि विदेशी मुद्रा भंडार 11 महीने से अधिक के आयात को कवर करने के लिये पर्याप्त है, जिससे यह संकेत मिलता है कि दीर्घकालिक दृष्टि से स्थिति मजबूत बनी हुई है।